जगदीशपुर अंचल में वर्ष 2017 के करीब 200 वंशावली की इंट्री नहीं

भागलपुर :पैतृक संपत्ति में वंशावली ही बंटवारे के असली हकदार की पुष्टि करता है. अब इस वंशावली को भी फर्जी बनाकर जमीन खरीद फरोख्त में प्रयोग हो रहा है. यह खुलासा हाल में पटना हाइकोर्ट में जमीन खरीद मामले के एक केस की सुनवाई में हुआ. हाइकोर्ट के निर्देश पर जिलाधिकारी प्रणव कुमार ने दो […]

भागलपुर :पैतृक संपत्ति में वंशावली ही बंटवारे के असली हकदार की पुष्टि करता है. अब इस वंशावली को भी फर्जी बनाकर जमीन खरीद फरोख्त में प्रयोग हो रहा है. यह खुलासा हाल में पटना हाइकोर्ट में जमीन खरीद मामले के एक केस की सुनवाई में हुआ.

हाइकोर्ट के निर्देश पर जिलाधिकारी प्रणव कुमार ने दो अलग-अलग तिथि में जारी वंशावली की जांच करवायी, तो फिर से जगदीशपुर अंचल सुर्खियों में आ गया. बिचौलिये ने मिलीभगत कर वर्ष 2017 में पत्रांक संख्या 1041 से वंशावली बनवा ली. अंचलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में कहा गया कि 31 दिसंबर 2017 तक आखिरी पत्रांक संख्या 849 से वंशावली जारी किया गया है. अंचल की उक्त जांच रिपोर्ट से प्रशासनिक पदाधिकारी भी हैरत मेंपड़ गये.

अब यह जांच का विषय है कि पत्रांक संख्या 849 व फर्जी निकले पत्रांक संख्या 1041 के बीच करीब 200 वंशावली बाजार में बिचौलिये के पास तो नहीं. प्रशासनिक स्तर पर यह जांच करवाना चाहिए कि इन फर्जी पत्रांक वाले वंशावली का प्रयोग कहां-कहां जमीन के सौदे में कानूनी तौर पर हो रहा है. बिचौलिये से मिलकर अंचल से वंशावली फर्जी बनावाने के जिम्मेदार की पहचान होनी चाहिए.
यह है मामला
बड़ी खंजरपुर निवासी गंगाधर मंडल ने 22 अक्तूबर 2011 को सीजेएम कोर्ट में नालसी किया. कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद दो प्लॉट जया चक्रवर्ती और मौनी चक्रवर्ती से मोजाहिदपुर के मौजा कुर्बान में 18 जनवरी 2010 और सात जून 2010 को लिया. उक्त जमीन सुधांशु मुखर्जी और उनकी पत्नी शांति मुखर्जी के नाम से थी.
उनकी मौत के बाद बेटा प्रदीप कुमार मुखर्जी और बेटी माधुरी मुखर्जी बची. मौखिक बंटवारे के बाद खंजरपुर का घर प्रदीप कुमार मुखर्जी व मौजा कुर्बान(मोजाहिदपुर) की जमीन माधुरी मुखर्जी के पास आयी. नौ जनवरी 2010 को माधुरी मुखर्जी ने जया चक्रवर्ती (सुधांशु मुखर्जी की नतिनी) को पावर ऑफ अटाॅर्नी दी. गंगाधर मंडल ने यह आरोप लगाया कि संबंधित जमीन को गलत तरीके से आरोपितों ने अपने नाम कर लिया. इसके बाद यह मामला सब जज प्रथम के यहां और वहां आदेश पारित हुआ था.
डीएम ने यह भेजी मामले में रिपोर्ट
डीएम ने अपनी रिपोर्ट में डीसीएलआर स्तर से जांच रिपोर्ट का उल्लेख किया. कहा कि 19 मई 2010 को पत्रांक संख्या 148 से जारी वंशावली सही है. हालांकि, इसका अभिलेख (रजिस्टर) जगदीशपुर अंचल में नहीं है. रेकॉर्ड के गुम होने से रजिस्टर नहीं मिल रहा है. इसको लेकर प्राथमिकी भी दर्ज की गयी है.
दूसरी वंशावली, जो 16 दिसंबर 2017 को पत्रांक संख्या 1041 है, वह फर्जी है. क्योंकि वर्ष 2017 में अंतिम वंशावली का पत्रांक संख्या 849 है. इसके आगे कोई वंशावली जारी नहीं हुई. रिपोर्ट में यह कहा गया कि तत्कालीन अंचलाधिकारी नवीन भूषण व कर्मचारी कपिलदेव महतो स्तर से मामले को लेकर जांच नहीं करवायी गयी.

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