भागलपुर : पबजी गेम ने इंटर में पढ़ने वाले छात्र की जान ले ली. पबजी खेल में साथी सैनिकों के मारे जाने और उसके ऊपर से गेम खेलने से मना करने के लिए मां-पिता की डांट ने 17 वर्षीय पीयूष कुमार को आहत कर दिया और उसने गुरुवार देर रात फंदे से लटककर जान दे दी. हबीबपुर थाने के दाऊद वाट निवासी राम विलास यादव जब गुरुवार देर रात 12 बजे बेटे के कमरे में गये, तो उन्होंने उसे घर में पंखे से फंदे के सहारे झूलता पाया. शुक्रवार की सुबह घटना की जानकारी पाकर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस ने पीयूष के कमरे से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया है.
पोस्टमार्टम पहुंचे पिता राम विलास यादव और मां बेबी भारती का रो-रोकर बुरा हाल था. दोनों इस बात को लेकर पछता रहे थे कि अगर उन्हें पता रहता है कि उनकी डांट की वजह से उनका बेटा आत्महत्या कर लेगा, तो वह ऐसा कभी नहीं करते. दोनों ने बताया कि पीयूष ने इसी वर्ष मिरजानहाट स्थित संत पथिक स्कूल से इंटर की परीक्षा पास की थी और उसने पार्ट वन के लिए कई कॉलेजों में दाखिला आवेदन भरा था. परीक्षा के बाद पिछले तीन महीने से पीयूष मोबाइल फोन पर पबजी खेल में पूरी तरह मशगूल हो गया था.
गुरुवार शाम छह बजे पीयूष घर की छत पर पबजी गेम खेलना शुरू किया. रात करीब 10:30 बजे पीयूष को डांट लगाते हुए गेम छोड़कर खाना खाने के लिए बुलाया. इसके जवाब में पीयूष ने मां को टेंशन नहीं देने की बात कहकर पबजी खेलता रहा, जिसके बाद उनकी पत्नी सोने चली गयी. आधा घंटा बाद करीब 11 बजे रात में पिता ने भी डांटते हुए खाना खाने के लिए बुलाया, लेकिन फिर भी वह नहीं आया. इसके बाद वह भी सोने चले गये.
रात करीब 12 बजे जब पिता की नींद खुली, तो वह बेटे के कमरे में गये, जहां बेटे को फंदे से लटकता देख चिल्लाना शुरू कर दिया. पिता की चिल्लाने की आवाज सुनकर मां भी उठकर कमरे में पहुंची. इसके बाद उन्होंने शव को फंदे से उतार रिश्तेदारों को फोन कर इस बात की सूचना दी. मामले में पुलिस को दिये गये आवेदन में भी पिता ने पबजी खेलने की वजह से आत्महत्या करने की बात कही है. उन्होंने पीयूष की मौत के लिये किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है.
एसएसपी ने युवाओं समेत माता-पिता से की अपील
भागलपुर के एसएसपी आशीष भारती ने अपील है कि पबजी मात्र एक गेम है, इसके एडिक्ट न बनें, इसे एक गेम की तरह ही लें. अगर गेम में कुछ उतार-चढ़ाव होता है, तो अपनी रियल लाइफ में कोई गलत कदम न उठाएं. अभिभावकों से भी अपील है कि वह अपने बच्चों पर निगरानी रखें. अगर बच्चे नहीं मानते हैं, तो इसके लिए काउसेलिंग के माध्यम से बच्चों को लगी गेम की लत को छुड़ाने का प्रयास करें.
सुसाइड नोट में लिखा
मैं पीयूष कुमार, पूरे होशो-हवास में सुसाइड करने जा रहा हूं. इसके पीछे किसी का हाथ नहीं है. इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार मैं हूं.
बस एक बात सभी माताओं और पिताओं को कहना चाहूंगा कि अपने बच्चों पर कभी किसी चीज का दबाव न डालें. इससे बच्चे अच्छे नहीं और खराब हो जाते हैं. पर शायद मेरी मां यह बात नहीं समझ पायी.
गुड बाय…पीयूष कुमार
