इत्तेहाद व इत्तेफाक का एक मकाम है ईदगाह

भागलपुर : ईदगाह में ईदैन की नमाज अदा की जाती है. इत्तेहाद व इत्तेफाक का एक मकाम ईदगाह है. ईदगाह में ईद और बकरीद की नमाज पढ़ने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. ईदगाह में हजारों अकिदतमंद नमाज अदा करने के लिए जुटते हैं. हजरत पैगंबर साहब भी खुले आसमान के नीचे ईदगाह […]

भागलपुर : ईदगाह में ईदैन की नमाज अदा की जाती है. इत्तेहाद व इत्तेफाक का एक मकाम ईदगाह है. ईदगाह में ईद और बकरीद की नमाज पढ़ने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. ईदगाह में हजारों अकिदतमंद नमाज अदा करने के लिए जुटते हैं. हजरत पैगंबर साहब भी खुले आसमान के नीचे ईदगाह में ईदैन की नमाज पढ़ाया करते थे. शहर में शाहजंगी, बरहपुरा व फतेहपुर में ईदगाह है.

शाहजंगी ईदगाह लगभग तीन सौ साल से भी अधिक पुराना है. बरहपुरा ईदगाह दो सौ साल पुराना है. फतहेपुर ईदगाह एक सौ साल से अधिक पुराना है. मदरसा जामिया शहबाजिया के हेड शिक्षक मुफ्ती मौलाना फारूक आलम अशरफी ने बताया कि ईदगाह की अलग फजीलत है. खुले आसमान के नीचे लोग ईदैन की नमाज अदा करते हैं.
हजरत पैगंबर साहब ईदगाह में ही नमाज अदा करते थे. ईदगाह में एकता, भाईचारा, इत्तेहाद व इत्तेफाक का हसीन मंजर देखने को मिलता है. ईद की नमाज के दौरान बंदे खुले आसमान के नीचे अल्लाह की बारगाह में हाजिर होते हैं. अल्लाह अपने बंदों को रहमतों की बारिश से नवाजते हैं. भीखनपुर जामा मस्जिद के इमाम हाफिज कारी नसीम अशरफी ने बताया कि ईदगाह में ईदैन की नमाज अदा की जाती है.
ईदैन की नमाज ईदगाह में पढ़नी चाहिए, इसकी बड़ी फजीलत है. ईदगाह में बहुत सारे मोहल्लों के लोग नमाज अदा करने आते हैं. ईदगाह में नमाज अदा करने के बाद लोग एक-दूसरे से गले मिलते हैं. यह मंजर सिर्फ ईदगाह में मिलेगा. मौके पर लोग एकता का इजहार पेश करते हैं. ईदगाह में देर से ईदैन की नमाज पढ़ायी जाती है. मस्जिद में जिन लोगों की ईदैन की नमाज छूट जाती है. वह लोग ईदगाह में आकर नमाज अदा करते हैं.

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