भागलपुर : इस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज से मिलता-जुलता संगठन भागलपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स बनाकर लोगों में भ्रम फैला रहे हैं. दरअसल जिन लोगों को चेंबर चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, उनलोगों ने मिलजुलकर अलग संगठन बना लिया. जबकि सभी इस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज से जुड़े हुए हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि संगठन बनाने के साथ ही नवनिर्वाचित पदाधिकारियों पर ठीक से काम नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि अभी मुश्किल से सवा महीना भी नहीं गुजरा.
मिलते-जुलते नाम से संगठन बनाकर फैला रहे भ्रम
भागलपुर : इस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज से मिलता-जुलता संगठन भागलपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स बनाकर लोगों में भ्रम फैला रहे हैं. दरअसल जिन लोगों को चेंबर चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, उनलोगों ने मिलजुलकर अलग संगठन बना लिया. जबकि सभी इस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज से जुड़े हुए हैं. […]

आरोप गलत है और आरोप लगाना अनुचित है. उक्त बातें इस्टर्न बिहार चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष अशोक भिवानीवाला ने संवाददाओं को जानकारी देते हुए कही. महासचिव रोहित झुनझुनवाला ने बताया कि 2007 में भी कुछ लोगों ने चेंबर के संवैधानिक पद छोड़ा और अलग संगठन बना लिया. फिर 2013 में इसी तरह रेडिमेड का संघ बना लिया. ऐसी परंपरा शुरू से रही है कि जैसे ही पद नहीं मिला और संगठन खड़ा कर लिया. संविधान में कार्रवाई का प्रावधान है.
संगठन विवाद के निबटारे के लिए होता है, न कि संगठन के कारण विवाद हो. कार्यकारिणी निर्णय लेगी कि क्या संवैधानिक कार्रवाई हो सकती है. 2019 के चेंबर चुनाव में जो हार गये, उन लोगों ने संगठन बना लिया, जबकि इससे पहले वेलोग खुद पदाधिकारी रह चुके हैं. उनके कार्यकाल में क्या काम हुआ, क्या नहीं, वे खुद उसके जिम्मेदार हैं. आज चेंबर ऑफ कॉमर्स पर व्यापारियों का भरोसा बढ़ता जा रहा है. इसी कारण प्रतिदिन सदस्यों की संख्या में वृद्धि हो रही है.
व्यापारियों की सुविधा के लिए मंगलवार को होल्डिंग टैक्स जमा करने के लिए विशेष शिविर लगाया जा रहा है. ताकि समय पर टैक्स जमा करके ब्याज देने से बच सकें. समय-समय पर उनके हित में काम करने को तत्पर हैं. इस मौके पर सचिव गिरधर गोपाल मावंडिया, नीरज कोटरीवाल, उपाध्यक्ष अजीत जैन, पुनीत चौधरी, मनीष बुचासिया, अभिषेक जैन, सुशील कोटरीवाल, अभिषेक डालमिया आदि उपस्थित थे.