भागलपुर : काउंटर पर यात्रियों के लिए कम पड़ रहा टिकट

ब्रजेश, भागलपुर : मंदारहिल रेलखंड पर जिस हिसाब से ट्रेनों की संख्या बढ़ी है, उस हिसाब से अभी भी टिकट की बिक्री नहीं हो रही है. इस पर रेलवे का भी ध्यान नहीं है. ऐसा नहीं है कि यात्री टिकट खरीदने से गुरेज करते हैं, बल्कि बिक्री के लिए छोटे स्टेशनों के काउंटर पर टिकट […]

ब्रजेश, भागलपुर : मंदारहिल रेलखंड पर जिस हिसाब से ट्रेनों की संख्या बढ़ी है, उस हिसाब से अभी भी टिकट की बिक्री नहीं हो रही है. इस पर रेलवे का भी ध्यान नहीं है. ऐसा नहीं है कि यात्री टिकट खरीदने से गुरेज करते हैं, बल्कि बिक्री के लिए छोटे स्टेशनों के काउंटर पर टिकट ही कम पड़ जा रहा है.
इस परिस्थिति में किसी भी छोटे स्टेशनों से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है. उन्हें बेटकिट रिस्क उठाते हुए भागलपुर में टिकट लेना पड़ रहा है.
इसकी कई बार शिकायत भी की गयी है मगर, इस पर रेलवे की ओर से कोई कार्रवाई तक नहीं हो सका है. सोमवार को भी बांका इंटरसिटी के समय में कई छोटे स्टेशनों पर यात्रियों को टिकट नहीं मिला.
यात्रियों द्वारा इसका कारण पूछे जाने पर काउंटर पर बैठे व्यक्ति ने टिकट खत्म होने की बात कही. लोग मजबूरन बेटिकट भागलपुर तक पहुंचे और फिर टिकट लेकर उसी ट्रेन से आगे का सफर पूरा किया गया.
टिकट लेकर ट्रेन में नहीं चलने वाले उतर जाते आउटर पर : मंदारहिल सेक्शन से भागलपुर आने वाली ट्रेनों में ज्यादतर आउटर पर ही रुक जाया करता है. ट्रेन रुक जाने पर वे आसानी से उतर जाते हैं.
पूंजी लगाने के लिए तैयार हैं मगर, टिकट बिकता नहीं है. सप्ताह में 50 टिकट उठाते हैं मगर, दो-चार टिकट ही बिकता है. रेलवे से पेट भरने लायक पैसा ही नहीं जुटेगा, तो टिकट स्टॉक कोई कैसे करेगा.
प्रकाश चौधरी, कांट्रैक्टर, पुरैनी स्टेशन
मंदारहिल रेलखंड के छोटे स्टेशनों पर कांट्रैक्टर सेल के आधार पर बिक्री के लिए टिकट ले जाता है. महीने में 5-10 हजार रुपये का ही टिकट बिकता है.
बुकिंग इंचार्ज, बुकिंग ऑफिस, भागलपुर जंक्शन
सेल नहीं बता कर कांट्रैक्टर बिक्री के लिए भागलपुर से ले जाते हैं कम टिकट
कांट्रैक्ट किसी को, चलाता कोई और है
छोटे स्टेशनों पर टिकट की बिक्री के लिए कांट्रैक्ट जिस किसी को मिला है, उसमें से ज्यादातर दूसरे को चलाने दे रखा है. दूसरों को जब बचत होती है, तभी टिकट पर पूंजी भी लगता है. वरना, कुछ काउंटर तो खुलता तक नहीं है. कांट्रैक्टर के अनुसार टिकट बिक्री के लिए एक व्यक्ति रखने का नियम है.
पांच-10 हजार से ज्यादा का नहीं बिकता टिकट
मंदारहिल रेलखंड के सभी छाेटो स्टेशनों को मिला कर महीने में पांच-10 हजार से ज्यादा टिकट नहीं बिकता है. दरअसल, छोटे स्टेशनों में कोई सप्ताह में 50 तो कोई 100 टिकट की बिक्री के लिए भागलपुर स्टेशन से ले जाता है. जबकि ट्रेनें यात्रियों से भरी हुई भागलपुर पहुंचती है.
टिकट कम पड़ जाने के ये रहे कारण
मंदारहिल रेलखंड पर छोटे स्टेशनों में टिकट बिक्री निजी हाथों में सौंपा गया है. इन स्टेशनों पर टिकट की बिक्री सरकारी स्तर पर नहीं, बल्कि निजी स्तर पर होती है. कांट्रैक्टर भागलपुर स्टेशन से टिकट ले जाकर छोटे स्टेशनों पर बिक्री करता है.
उनकी ओर से सेल नहीं बता कर टिकट ही कम लाया जाता है. सेल जिस दिन ज्यादा होती है, उस दिन यात्रियों के लिए टिकट ही कम पड़ जाता है. इस तरह से सप्ताह में दो-तीन दिन छोटे स्टेशनों के काउंटर पर टिकट ही नहीं मिलता है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

bhagalpur news. भागलपुर में विकसित होंगी राष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं, धोनी और ईशान किशन की राह पर निकलेंगे नये सितारे

bhagalpur news. पुलिया हटाने के विरोध मामले में जांच करने पहुंचे एसडीएम व नाथनगर विधायक

bhagalpur news. समय पर पूरा करें प्रखंड में संचालित योजनाएं

bhagalpur news. प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे व साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो - लोकभवन ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने दिया निर्देश- लोकभवन ने पत्र में कहा, निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायेवरीय संवाददाता, भागलपुरपीजी व कॉलेज में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो. इसे लेकर लोकभवन के विशेष कार्य अधिकारी न्यायिक कल्पना श्रीवास्तव ने टीएमबीयू सहित सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में पत्र भेजा है. पत्र में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार को लेकर सचिवालय ने विवि प्रशासन को सख्त रुख अपनाने के लिए कहा है. शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायी जाये.लोकभवन से जारी पत्र में कहा कि पूर्णकालिक कार्यरत सभी शिक्षकों को सेमेस्टर के दौरान प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो.शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह लागू रहेगापत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यूनतम कार्यभार एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह यानी 180 कार्य दिवसों तक लागू रहेगा. साप्ताहिक 40 घंटे के कार्यभार को छह कार्य दिवसों में समान रूप से विभाजित करने का निर्देश दिया है. कहा कि यूजीसी के प्रावधानों में भी कार्यभार से संबंधित इसी तरह के मानदंड निर्धारित हैं. जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है. उनका पालन अनिवार्य है. उन मानकों को सख्ती से लागू कर बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करें.लोकभवन को मिली शिक्षकों के गायब रहने की शिकायतलोकभवन को शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत मिल रही है. अंदरखाने की मानें, तो कुछ छात्र संगठन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कॉलेज व पीजी विभागों में निर्धारित समय से पहले ही गायब रहने की शिकायत लोकभवन से की है. इसे लेकर कुलाधिपति सख्त होते दिख रहे है. ऐसे में कॉलेजों व पीजी विभाग का औचक निरीक्षण भी किया जा सकता है.ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी की नहीं होती है क्लासकॉलेज में ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी विषय की क्लास नहीं होती है. एक दिन पहले छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने एक कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता के दौरान कहा था कि एमजेसी (ऑनर्स) विषय की क्लास होती है, लेकिन एमआइसी (सब्सिडियरी) विषय की क्लास नहीं होती है. छात्र संगठन का आरोप था कि एईसी, वीएसी व एसीसी की भी क्लास भी नहीं होती है.लोकभवन के निर्देश का हो रहा पालन - शिक्षक संगठनशिक्षक संगठन भुस्टा के महासचिव प्रो जगधर मंडल ले कहा कि लोकभवन के निर्देश का पालन हो रहा है. यूजीसी के नियमानुसार कॉलेज व पीजी विभागों में पांच घंटे तक शिक्षकों रहते हैं. सारा कार्य करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. शिक्षक लोकभवन के साथ है.

यह भी पढ़ें >