भागलपुर : जीरोमाइल थाना में दर्ज भागलपुर बाल गृह में रहने वाले बच्चों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले की समीक्षा शनिवार को जोनल आइजी सुशील मानसिंह खोपड़े ने की. इस दौरान आइजी ने थानाध्यक्ष को मामले में बाल गृह का संचालन करने वाली संस्था के कर्मियों और अधिकारियों का बयान लेने का निर्देश दिया है.
समीक्षा के दौरान आइजी ने मुंगेर जिला में बाल गृह मामले में दर्ज दो केसों की भी समीक्षा की. तीनों ही मामलों में आइजी ने जांचकर्ता और मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारियों को 34 बिंदुओं पर जांच करने का आदेश दिया है.
आइजी ने बताया कि समीक्षा के दौरान मामला दर्ज होने के बाद से लेकर मामले में अबतक हुई प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गयी थी. दोनों जिला में दर्ज तीन केसों में बनायी गयी रिपोर्ट और स्टेशन डायरी की समीक्षा के दौरान आइजी ने कई खामी पायी. इस दौरान जीरोमाइल थाना में दर्ज केस में अभी तक संचालक संस्था के सभी कर्मियों और अधिकारियों का बयान नहीं लिया गया था. इसे पूरा करने का निर्देश दिया गया.
आइजी ने बताया कि दोनों जिला में दर्ज मामलों के अनुसंधानकर्ता, थानाध्यक्ष और मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारियों को मामले में 34 बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट 10 दिनों के भीतर तैयार करने को कहा है. उन्होंने बताया कि 10 दिन के बाद दोनों जिला के मामलों की फिर से समीक्षा की जायेगी. इसके बाद इसकी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भी सौंपी जायेगी.
आइजी ने बताया कि 18 जुलाई 2018 को जीरोमाइल थाना में दर्ज भागलपुर बाल गृह मामले में बाल गृह केंद्र के पूर्व अधीक्षक प्रदीप शर्मा की गिरफ्तारी हुई है. मुजफ्फरपुर में बालिक गृह मामला उजागर होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने भागलपुर बाल गृह पर बनाये गये टिस की रिपोर्ट को आधार बनाकर मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया था. मामले में जिला के डीएम और एसएसपी के निरीक्षण के दौरान बाल गृह के पूर्व अधीक्षक प्रदीप शर्मा के विरुद्ध मारपीट किये जाने की बात का खुलासा हुआ था. इस मामले में पुलिस को प्रदीप शर्मा के विरुद्ध कई अन्य दस्तावेज भी हाथ लगे थे.
अनियमितता की जांच करेगी अंकेक्षण टीम
आइजी सुशील मानसिंह खोपड़े ने बताया कि भागलपुर में दर्ज केस में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और संचालक संस्था द्वारा की गयी अनियमितता का आरोप लगा था. मामले में र्दुव्यवहार मामले में एक गिरफ्तारी हुई है जबकि मामले में अग्रतर जांच की जा रही है. इसके अलावा अनियमितता की जांच के लिये भागलपुर एसएसपी को डीएम की मदद लेने के लिये निर्देशित किया गया है.
मामले में एसएसपी डीएम से अनियमितता की जांच के लिये अंकेक्षण टीम (ऑडिट टीम) बनाये जाने की मांग को लेकर पत्र लिखेंगे. उक्त रिपोर्ट के आधार पर ही मामले में आगे की जांच हो पायेगी.
