राजभवन अब विश्वविद्यालयों के प्रतिकुलपति की सक्रियता बढ़ाने की कर रहा तैयारी
राजभवन ने 31 अगस्त की बैठक में राज्य के विवि के कुलपतियों को दिया था सुझाव
भागलपुर : राज्य के विश्वविद्यालयों में प्रतिकुलपतियों की सक्रियता बढ़ने जा रही है. विवि में उनकी भूमिका अहम होगी. राजभवन ने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि परीक्षा बोर्ड में प्रतिकुलपति को शामिल किये जाये.परीक्षा और रिजल्ट से जुड़ी व्यवस्थाओं में भी विवि को प्रतिकुलपति का सहयोग लें. राजभवन ने यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (यूएमआइएस) में भी प्रतिकुलपति की भूमिका तय करने को कहा है.
31 अगस्त को राजभवन में प्रतिकुलपतियों की बैठक में यह बात रखी गयी थी कि कई मामलों में प्रतिकुलपति या तो शामिल नहीं किये जाते हैं या शामिल होते भी हैं, तो भूमिका शून्य रहती है. 30 साल पहले बने नियम-परिनियम में संशोधन की जरूरत है. वर्षों से बने नियम-परिनियम में प्रतिकुलपति की भूमिका सीमित रखी गयी है. टीएमबीयू की बात करें, तो एक तरफ स्नातक तक की परीक्षा व रिजल्ट की जवाबदेही प्रतिकुलपति और पीजी तथा शोध स्तर की जिम्मेदारी कुलपति की तय है. प्रतिकुलपति परीक्षा से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण इकाइयों में एक परीक्षा बोर्ड में नहीं हैं. परीक्षा कॉपियों की व्यवस्था व रिजल्ट के लिए एजेंसी तय करने के सिस्टम में भी प्रतिकुलपति सीधे तौर पर शामिल नहीं होते हैं. यही हाल राज्य के दूसरे विश्वविद्यालयों में भी है.
राजभवन के अधिकारी 31 अगस्त को प्रतिकुलपतियों के साथ बैठक की तो ज्यादातर विवि के प्रतिकुलपतियों ने यह मामला उठाये. टीएमबीयू के प्रतिकुलपति प्रो रामयतन प्रसाद ने बताया कि बैठक में उन्होंने भी यह बात रखी थी कि अगर स्नातक स्तर तक की परीक्षा व रिजल्ट की जिम्मेदारी प्रतिकुलपति की है, तो उन परीक्षाओं व रिजल्ट की व्यवस्था में भी प्रतिकुलपति की भूमिका होनी चाहिये. टीएमबीयू में ही कॉपी की खरीद या रिजल्ट के लिए एजेंसी तय होने को लेकर मामला अटकता रहता है. ऐसे में समय पर परीक्षा लेना व रिजल्ट प्रकाशित करना आसान नहीं होता है. प्रतिकुलपतियों की अपील पर राजभवन ने भी माना कि कई काम में परेशानी से प्रतिकुलपति का सहयोग नहीं लिया जाना है.
