कौन बात है, जो हमसे छिपा रहे हो

भागलपुर : घर पर फोन आया था. पता चला कि मेरे राकेश के ऊपर पेड़ गिर गया है. वह घायल है, कहां है मेरा राकेश, मायागंज अस्पताल में दिख तो नहीं रहा है. आखिर इतने बड़े अस्पताल में उसे कहां रखा गया है, कोई बतायेगा क्या? सवाल दर सवाल संगीता अपने भाई राकेश के दोस्त […]

भागलपुर : घर पर फोन आया था. पता चला कि मेरे राकेश के ऊपर पेड़ गिर गया है. वह घायल है, कहां है मेरा राकेश, मायागंज अस्पताल में दिख तो नहीं रहा है. आखिर इतने बड़े अस्पताल में उसे कहां रखा गया है, कोई बतायेगा क्या? सवाल दर सवाल संगीता अपने भाई राकेश के दोस्त से कर रही थी. हर कोई शांत था. मायागंज अस्पताल के बाहर का यह संवाद लोगों को भी परेशान कर रहा था. अचानक संगीता राकेश के दोस्त को पीछे छोड़ अपने चचेरे भाई ललन के पास जाती है.

सीधे सवाल करती है कहां छै राकेश, दोनों ते साथे छल्हीं. यह सुनकर ललन शांत हो जाता है, संगीता से नजर नहीं मिला पाता. इसी बीच राकेश का छोटा भाई मुकेश वहां पहुंचा और अपनी बहन को बदहवास देख, खुद भी अपना होश खोने लगा. राकेश का दोस्त उसे पकड़ने के लिए दौड़ता है.

एक्स रे रूम के बाहर किसी तरह मुकेश को शांत कर बैठाया जाता है. अपने भाई के पास संगीता कुछ देर रहती है इसके बाद सीधे बाहर जाकर राकेश को खोजने लगती है. संगीता अचानक अपना हाथ जोड़ सूर्य को देख कहती है, हेय छठी मैया सूप चढ़ैभों हमरो राकेश जहां छै ठीक करी दहो. इस प्रार्थना को वो बार-बार कर रही थी. राकेश के दोस्त संगीता और मुकेश को शांत करने का प्रयास कर रहे थे. दोनों किसी की एक नहीं सुन रहे हैं, बस अपने राकेश को खोजने में लगे थे. किसी भी चिकित्सक को देखते तो पूछना आरंभ कर देते थे कि, किस जगह पर राकेश का इलाज कर रहे हैं, बताइये न. दूसरी ओर संदीप कुमार दास की मां ओटी के बाहर अपने बेटे के बाहर आने का इंतजार कर रही थी. इनके साथ इनका जुड़वां भाई राजीव बैठा था.
मां ने बताया कि हमें इस घटना की जानकारी रिश्तेदारों से हुई. संजीव के फोन से किसी ने रिश्तेदार को फोन किया था. घटना की जानकारी होते ही भागे-भागे सभी अस्पताल पहुंचे. यहां ओटी के बाद इमरजेंसी में उसका इलाज चल रहा है. चिकित्सक कह रहे हैं कि, उसकी हालत गंभीर है. ऐसे में पता नहीं क्या होगा. हमारी बहू कंचन की भी हालत गंभीर है. ऐसे में क्या कहें कुछ समझ नहीं आ रहा है.
डॉ बीपी साहा के पुत्र थे संदीप: संदीप को अस्पताल में लाया गया तो इसके इलाज में चिकित्सक लगे रहे. इनकी मां और भाई आधे घंटे के बाद यहां पहुंचे. चिकित्सक से डॉ साहा लगातार सवाल करते रहे. इनकी हालत की जानकारी लेने के बाद बेहतर इलाज करने की सलाह भी देते रहे. इस बीच डॉ साहा संदीप की मां को भी साहस देते रहे. मां लगातार अपना हौसला खोती रही. संदीप को बाजार में अपना बीज का व्यापार है. जबकि, डॉ साहा शिशु रोग विशेषज्ञ हैं.
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