कितनी मौतों के बाद बनेगा बाइपास

चार साल से हो रहा बाइपास के निर्माण का इंतजार दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ा भागलपुर : लगभग चार साल से शहर को बाइपास का इंतजार है. इस साल चुनाव से पहले जब उम्मीद जगी, तो मामला हाइ कोर्ट में चला गया. बाइपास नहीं बनने से शहर में वाहनों को दबाव बढ़ता जा रहा है. लंबी […]

चार साल से हो रहा बाइपास के निर्माण का इंतजार

दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ा

भागलपुर : लगभग चार साल से शहर को बाइपास का इंतजार है. इस साल चुनाव से पहले जब उम्मीद जगी, तो मामला हाइ कोर्ट में चला गया. बाइपास नहीं बनने से शहर में वाहनों को दबाव बढ़ता जा रहा है. लंबी हो रही वाहनों की कतार से जाम लगता रहता है. दुर्घटनाएं भी बढ़ गयी. शनिवार सुबह भी बाल्टी कारखाना के पास ट्रक के धक्के से शाहजंगी निवासी आफताब आलम का पुत्र तबरेज की मौत हो गयी. अब तक में डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी है.

पिछले साल 50 से अधिक मौत हुई थी. चार साल में बाइपास के निर्माण को लेकर 2010 में जमीन अधिग्रहण का काम हुआ. इसके बाद डीपीआर को स्वीकृति के लिए भेजा गया. स्वीकृति मिलने के बाद मंत्रालय से बाइपास को हरी झंडी मिली. पहले चरण रिक्वेस्ट फॉर क्वानटिटी का टेंडर हुआ. इसके बाद दूसरे चरण का टेंडर (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) 23 फरवरी को किया गया. इस साल अंतिम दौर के टेंडर में चार कंपनियां जयपुर की जीआर इंफ्रा समेत हैदराबाद की अवंतिका, मुंबई की गैमन व जेकेएम पहुंची. बिड रेट कम रहने के कारण जयपुर की जीआर इंफ्रा का नाम तय किया गया है.

कहां और क्यों अटका है बाइपास का मामला : बाइपास निर्माण का मामला हाइकोर्ट में है. असल में जब जयपुर की जीआर इंफ्रा का नाम तय हुआ और इसके प्रपोजल पर मंत्री का हस्ताक्षर होने की बारी आयी, तो आचार संहिता लागू हो गयी. आचार संहिता समाप्त होती और मंत्री प्रपोजल पर हस्ताक्षर करते, इससे पहले हैदराबाद की कंपनी अवंतिका कई गंभीर आरोप लगा कर हाइकोर्ट चली गयी. इसके बाद से मामला अटका है. बाइपास निर्माण को लेकर ठेकेदारों के बीच की लड़ाई में भागलपुर के लोगों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है. अधिकारियों ने बताया कि हाइकोर्ट में मामला नहीं रहता, तो जीआर इंफ्रा के प्रपोजल पर हस्ताक्षर हो जाता और उन्हें टेंडर भी अवार्ड हो गया रहता.

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