भागलपुर : एनएच 80 पर पिछले दो-तीन सप्ताह से काम लगातार जारी है. लेकिन बरसात होते ही सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जा रहा अलकतरा बेअसर साबित हो रहा है. दूसरी ओर बरसात शुरू होने के बाद भी यहां सरकारी नियमों की अनदेखी कर अलकतरे का इस्तेमाल कर सड़क का निर्माण कार्य जारी है. ज्यादातर जगहों पर गीली सड़क पर ही अलकतरा डाला जा रहा है, ऐसे में मेटेरियल अच्छी तरह नहीं चिपक पा रहा और हल्की बारिश में ही बनी-बनाई सड़क के धुल जा रही.
जेल रोड पर संवेदक द्वारा बारिश के दौरान निर्माण किये जाने से लोग भी चिंतित हैं, ऐसे में सड़क की गुणवत्ता भगवान भरोसे ही है. बारिश के मौसम में भी अलकतरे की सड़क निर्माण की स्वीकृति विभाग ने कैसे दे दी, यह भी जांच का विषय है.
पहले भी 10.59 करोड़ की लागत से बरसात के मौसम में ही सड़क का निर्माण शुरू करवाया गया था. लेकिन सड़क एक तरफ से बन रही थी, तो दूसरी तरफ से उखड़ती चली गयी. बाद में प्रशासन की चेतावनी के बाद एनएच विभाग ने ठेकेदार से पैअचप वर्क करवाया था.
ये उठ रहे सवाल
बारिश के मौसम में अलकतरा की सड़क निर्माण की स्वीकृति विभाग ने कैसे दी.
जेल रोड में सड़क का निर्माण कैसे हो रहा है.
सड़क की जांच करने वाला कोई नहीं है.
इंजीनियरों की मॉनीटरिंग में क्यों नहीं हो रहा काम.
कैंप से सेंट्रल जेल तक चकाचक दिखने वाली सड़क कहीं उखड़ न जाये
कैंप जेल से सेंट्रल जेल के बीच अलकतरा की सड़क बनी है और यह चकाचक दिख रही है. मगर, बरसात के बाद यह टिकेगी भी कि नहीं, इसपर संशय बरकरार है. दरअसल, तकनीकी विशेषज्ञ का मानना है कि बरसात के दौरान बनने वाली सड़क पानी के कारण गिट्टियाें को ठीक से पकड़ नहीं पाती है. चकाचक दिखने वाली सड़क बाद में उखड़ जाती है. पर इसका ठीकरा संवेदक और विभागीय अधिकारियों पर फूटता है.
गोपालपुर मोड़ से जीरोमाइल के बीच रहा गिट्टी-मोरंग का काम
सेंट्रल जेल से हवाई अड्डा के बीच डब्ल्यूएमएम का काम नहीं कराया गया है. गोपालपुर मोड़ से जीरोमाइल के बीच गिट्टी-मोरंग का काम हो रहा है. वाहनों के दबाव से कार्य में बाधा पहुंच रही है. ओवरलोड वाहनों के अत्यधिक परिचालन से कराया जा रहा डब्ल्यूएमएम जगह-जगह धंस रहा है. यह लेबल में नहीं है, जिससे अलकतरा की मजबूत सड़क बनने की गुंजाइश कम नजर आ रही है.
