मेरी '' मन:स्थिति '' ठीक नहीं, अभी जवाब देने के लिए तैयार नहीं हूं

भागलपुर : 1200 करोड़ से अधिक के सृजन घोटाले के आरोपित गिरफ्तार व जेल में बंद सस्पेंड पूर्व जिला नजारत लिपिक अमरेंद्र यादव ने शोकॉज पर जवाब दे दिया है. डीएम के निर्देश पर सस्पेंड लिपिक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई चल रही है. संचालन पदाधिकारी डीटीओ राजेश कुमार ने गठित आरोप पत्र पर उनका जवाब […]

भागलपुर : 1200 करोड़ से अधिक के सृजन घोटाले के आरोपित गिरफ्तार व जेल में बंद सस्पेंड पूर्व जिला नजारत लिपिक अमरेंद्र यादव ने शोकॉज पर जवाब दे दिया है. डीएम के निर्देश पर सस्पेंड लिपिक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई चल रही है. संचालन पदाधिकारी डीटीओ राजेश कुमार ने गठित आरोप पत्र पर उनका जवाब जानने के लिए पिछले दिनों अमरेंद्र यादव को शोकॉज पत्र जेल में भेजा था.
उस पत्र के जवाब में आरोपित लिपिक ने उल्लेख किया कि मैं मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हूं. मेरी मन:स्थिति भी ठीक नहीं है. इस स्थिति में लगाये गये आरोप पर क्या जवाब दूं, यह समझ में नहीं आ रहा है. इस कारण फिलहाल जवाब देने में सक्षम नहीं हूं. घोटाले के दूसरे आरोपित भू अर्जन के नाजिर राकेश झा को भी शोकॉज पत्र जेल में गया था, मगर कोई जवाब नहीं आया है.
पहले हुआ था फरार, फिर मानसिक रोगी बन कर आया भागलपुर: नजारत शाखा के बैंक खाते बैंक ऑफ बड़ौदा व इंडियन बैंक में थे. बैंक में जमा राशि से होनेवाली निकासी का सारा हिसाब-किताब जिला नजारत का लिपिक अमरेंद्र ही करता था. सृजन महिला विकास सहयोग समिति के खाते में मुख्यमंत्री क्षेत्रीय विकास योजना की सरकारी राशि के जाने की शुरुआती जांच में नजारत शाखा के लिपिक अमरेंद्र ने सहयोग किया.
मगर जैसे ही कार्रवाई हुई, वह सर्किट हाउस की दीवार को फांद कर फरार हो गया था. फरारी के दौरान ही अमरेंद्र ने स्पीड पोस्ट से एक पत्र भेजा, जिसमें उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में खुद का इलाज कराने का उल्लेख किया.सृजन घोटाले से पहले ‘ बुलेट वाले ‘ के रूप में मशहूर अमरेंद्र यादव का पूरा रसूख था. कलेक्ट्रेट में उसके सामने किसी की नहीं चलती थी.
भागलपुर : वर्ष 2007 से 2017 के एक दशक में घोटालेबाजों की जद में पूरी तरह सरकारी योजनाओं की राशि आ गयी थी. लोक कल्याण के लिए सरकार भागलपुर में बजट भेजती थी. इस बजट को ट्रेजरी से लोक कल्याण के नाम पर ही ट्रेजरी से बिल के तौर पर सरकारी नियम के तहत निकासी करायी जाती थी. फिर उसके बाद घोटाले का खेल होता और बिल के माध्यम से अवैध निकासी कर सृजन के खाते में सीधी राशि जमा हो जाती.
लोक कल्याण के लिए ट्रेजरी से निकली और सृजन के कल्याण में गटक गये
हाल यह था कि घोटालेबाजों को जब खुद के बड़े काम होते, तब लोक कल्याण के नाम पर संबंधित विभाग अपने बिल को ट्रेजरी के पास भेजते, ताकि वह राशि सृजन के खाते में पहुंच सके. इस पूरे खेल का मैनेजमेंट इतना गोपनीय और सटीक था, कि किसी को भनक तक नहीं लगती. सब आंखों के इशारे पर हो जाता.
महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़ों पर गौर करें तो लोक कल्याण के नाम पर ट्रेजरी से 253 बिल के नाम पर 355.45 करोड़ रुपये की राशि की निकासी हुई. सबसे लंबे समय तक ट्रेजरी से बिल की निकासी कर सृजन खाते को मालामाल करने का काम कल्याण विभाग ने किया. इस विभाग में दिसंबर 2007 से शुरू हुए घोटाले का खेल मार्च 2017 तक चला. जिला परिषद की योजनाओं के पैसे मार्च 2008 से जनवरी 2017 के बीच बिल से निकासी कर सृजन कल्याण के रूप में प्रयोग हुआ. जबकि जिला नजारत व डीआरडीए भागलपुर द्वारा संचालित योजनाओं की राशि को अवैध रूप से जमा कराने का सिलसिला चार सालों तक हुआ.
ट्रेजरी को विभिन्न स्कीम को लेकर भेजे बिल, जो हुए पास
जिला नजारत शाखा: विकास को लेकर 9.54 करोड़, स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर 0.68 करोड़, दंगा पीड़ित को लेकर 1.12 करोड़, मुआवजा राशि के लिए 1.27 करोड़, पीएसीसी चयन पर 0.86 करोड़, व्यावसायिक विशेष सेवा को लेकर 0.25 कराेड़, सर्किट हाउस के नाम पर 0.13 करोड़, कार्यालय खर्च को लेकर 0.15 करोड़, श्रावणी मेला के नाम पर 0.41 करोड़, प्रिंट व पब्लिकेशन को लेकर 0.10 करोड़, नाव मरम्मत के नाम पर 0.25 करोड़, बाढ़ मुआवजा के लिए 0.46 करोड़, जनगणना को लेकर 1.05 करोड़, भू अर्जन के नाम पर 1.40 करोड़.
सरकार को भेजी जायेगी रिपोर्ट
जिला प्रशासन द्वारा सृजन घोटाले की ऑडिट रिपोर्ट में संबंधित विभागों से किये गये सवाल पर जवाब मांगा था. इसको लेकर कई विभागों ने जवाब भेज दिये. इन जवाब को महालेखाकार को भेजा जायेगा. डीएम प्रणव कुमार के मुताबिक, विभाग के जवाब की कोई समीक्षा नहीं होगी, बल्कि जैसे ही जवाब आयेगा, उन्हें कंपाइल करके भेज देंगे.

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