सरकार ने किया प्रतिबंधित शहर में नहीं दिख रहा असर

भागलपुर : इस बरसात में अगर आप मलेरिया से ग्रसित हो जायें तो इसकी जांच को लेकर सतर्क रहें. सामान्य रूप से एंटीबॉडी डिटेक्टिंग रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट का प्रयोग रोग की पहचान के लिए किया जाता है. लेकिन इस टेस्ट पर लगातार सवाल उठने के कारण सरकार ने 23 मार्च 2018 को इस पर प्रतिबंध […]

भागलपुर : इस बरसात में अगर आप मलेरिया से ग्रसित हो जायें तो इसकी जांच को लेकर सतर्क रहें. सामान्य रूप से एंटीबॉडी डिटेक्टिंग रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट का प्रयोग रोग की पहचान के लिए किया जाता है. लेकिन इस टेस्ट पर लगातार सवाल उठने के कारण सरकार ने 23 मार्च 2018 को इस पर प्रतिबंध लगा दिया है. लेकिन इसका असर शहर में नहीं दिख रहा है. कई पैथोलैब में इसका प्रयोग किया जा रहा है. आलम यह है की शहर के कई चिकित्सकों को इस प्रतिबंध की जानकारी तक नहीं है.

आखिर क्यों किया गया प्रतिबंधित : एंटीबॉडी डिटेक्टिंग रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट से मरीजों की बीमारी के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाती थी. इसमें पॉजिटिव मरीजों की पहचान भी नहीं हो पाती थी. चिकित्सक को डायग्नोस्टिक में परेशानी होती थी. मच्छर के काटने से मलेरिया का एंटीबॉडी देर से बनता है. सटीक जानकारी टेस्ट से नहीं हो पाता था.
कई पैथोलैब में आसानी से उपलब्ध हैं किट : प्रतिबंध के बाद भी शहर के कई पैथोलैब में एंटीबॉडी डिटेक्टिंग रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किट दो से चार सौ रुपये में उपलब्ध है. मुनाफा ज्यादा होने के कारण पैथोलैब संचालक इस किट से ही मलेरिया के जांच कर देते हैं. जो बीमारी बढ़ाने का काम करता है.
प्रतिबंधित होने के बाद भी शहर में धड़ल्ले से हो रही है मलेरिया के लिए एंटीबॉडी डिटेक्टिंग रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट
इस जांच से मरीज रहें सतर्क, कई और कारगर जांच उपलब्ध : डाॅ डीपी सिंह कहते हैं, एंटीबॉडी डिटेक्टिंग रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट कारगर नहीं होने के कारण ही प्रतिबंधित किया गया है. ऐसे में मलेरिया के मरीज अपनी जांच कराने से पहले सतर्क रहें. मलेरिया की पहचान के लिए कई जांच और भी हैं. प्रतिबंधित किट का प्रयोग किसी भी सूरत में न करें. एंटीबॉडी डिटेक्टिंग रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट के परिणाम से चिकित्सक के साथ-साथ मरीज भी परेशान थे.

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