Bhagalpur News. 09 बालू घाटों में चार की बंदोबस्ती, तीन को नहीं मिला इनवायरमेंट क्लियरेंस, सिर्फ एक का संचालन

बालू संकट से पार पाना मुश्किल हो गया है. बालू खनन टेंडर में पेच फंस रहा है. नौ बालू घाटों में से महज चार की बंदोबस्ती हो पायी है.

ब्रजेश, भागलपुर बालू संकट से पार पाना मुश्किल हो गया है. क्योंकि, बालू का खनन टेंडर के पेच में फंसा है. नदियों की बंदोबस्ती की प्रक्रिया खनन विभाग पांच साल बाद भी पूरी नहीं कर सका है. घाटों का ठेका लेने में कांट्रैक्टर रुचि नहीं ले रहे है. इस कारण घाटों से बालू बिक्री का रास्ता साफ नहीं हो सका है. भागलपुर जिले में चार नदियों के 09 बालू घाट (यूनिट) चिह्नित हैं. पांच सालों में खान विभाग ने सिर्फ तीन नदियों के चार घाटों की ही बंदोबस्ती कर सकी है. जिसमें सिर्फ एक घाट गेरुआ नदी का यूनिट-1 ही संचालित हो रहा है. बाकी तीन घाट इनवायरमेंट क्लियरेंस के पेच में अभी भी फंसा है. वहीं, पांच घाटों का टेंडर नहीं हो सका है. भागलपुर शहर में जो बालू की बिक्री हो रही है, उसमें ज्यादातर बांका जिले की नदियों की है. लोगों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. यही बालू अगर भागलपुर जिले की नदियों की रहती, तो कम कीमत में आसानी से उपलब्ध होता. 09 वें टेंडर के बाद भी घाटों का ठेका करने में नहीं मिली सफलता खनन विभाग ने पांच साल में 09 वीं बार टेंडर निकाला है. बावजूद, इसके सभी 09 बालू घाटों की बंदोबस्ती करने में असफल रहा है. पहला टेंडर 23 नवंबर, 2019 को निकाला था और 09 वां टेंडर 12 अप्रैल, 2023 को किया था. इस दौरान सिर्फ चार घाटों की बंदोबस्ती कर सका है. सालभर से लटका है पांच बालू घाटों की बंदोबस्ती जिले के तीन नदियों के पांच बालू घाटों की बंदोबस्ती एक साल से ठप है. खनन विभाग ने न तो इसके लिए कोई निविदा जारी की है और किसी तरह की कोई प्रकिया अपना रही है. इसमें चांदन नदी का तीन, गोरुआ नदी का एक एवं अंधरी नदी का एक बालू घाट शामिल है. बंदोबस्ती राशि जितनी बालू नदियों में नहीं भागलपुर जिले के बालू घाटों की बंदोबस्ती के लिए सुरक्षित जमा राशि 25 करोड़ रखी है. जानकारों की मानें, तो जितनी राशि से बंदोबस्ती होगी, उतनी राशि का नदियों में बालू नहीं है. दरअसल, नदियों में 1995 की तरह बाढ़ नहीं आयी है. बाढ़ नहीं आने से पहले की तरह बालू भी जमा नहीं हुआ है. बालू खनन से नदियों हो गयी है नीची, खेतिहर भूमि ऊंची लगातार बालू खनन से नदियां नीची हो गयी है और खेतिहर भूमि ऊंची. इस कारण नदियों की पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रही है. किसान बेहद परेशान हैं. वहीं, कई जगहों पर नदी संकरी हो गयी है. कोकरा नदी की बात करें, तो जगदीशपुर ब्लॉक के पास जितनी चौड़ी है, उतनी गोराडीह प्रखंड के डहरपुर व भयगांव के पास नहीं है. 1. बालू घाटों की अबतक बंदोबस्ती नहीं चानन नदी : यूनिट-01, 02 व 03 बालू घाट गेरुआ नदी : यूनिट-02 बालू घाट अंधरी नदी : यूनिट- 01 बालू घाट 2. बंदोबस्त नदियों के बालू घाट कोसी नदी : यूनिट- 01 बालू घाट गेरुआ नदी : यूनिट- 01 व 03 बालू घाट चांदन नदी : यूनिट- 04 बालू घाट 3. संचालित बालू घाट गेरुआ नदी : यूनिट-1 बालू घाट 4. टेंडर हुआ, मगर इनवायरमेंट क्लियरेंस का पेच कोसी नदी : यूनिट- 01 बालू घाट गेरुआ नदी : यूनिट- 03 बालू घाट चांदन नदी : यूनिट- 04 बालू घाट 5. कब-कब निकला टेंडर पहला टेंडर : 23 नवंबर 2019 दूसरा टेंडर : 18 दिसंबर 2019 तीसरा टेंडर : 14 सितंबर 2022 चौथा टेंडर : 26 अक्टूबर 2022 पांचवा टेंडर : 02 दिसंबर 2022 छठा टेंडर : 21 दिसंबर 2022 सातवां टेंडर : 17 जनवरी 2023 आठवां टेंडर : 28 फरवरी 2023 नौवां टेंडर : 12 अप्रैल 2023 — डीएम से संपर्क कर ई-नीलामी निकालने का मिला निर्देश खनन विभाग के मुख्यालय का जिला खनिज विकास पदाधिकारी को निर्देश मिला है कि जिन बालू घाटों की बंदोबस्ती नहीं हो सकी है, उसका वह डीएम से संपर्क स्थापित कर ई-नीलामी जारी करना सुनिश्चित करेंगे. साथ ही जिस बालू घाटों का बंदोबस्ती हाे चुका है और किसी कारणवश संचालित नहीं हो रहा है, उसका भी संचालन सप्ताह भर के अंदर शुरू करेंगे. कोट : जिले के चार बालू घाटों की बंदोबस्ती हो चुकी है. सिर्फ एक बालू घाट का इनवायरमेंट क्लियरेंस मिलने से संचालित हो रहा है. बाकी बंदोबस्त बालू घाटों का इनवायरमेंट क्लियरेंस मिलने के साथ संचालित होने लगेगा. पांच बालू घाटों की बंदोबस्ती की प्रक्रिया अपनायी जायेगी. केशव कुमार जिला खनिज विकास पदाधिकार, भागलपुर

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bhagalpur news. प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे व साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो - लोकभवन ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने दिया निर्देश- लोकभवन ने पत्र में कहा, निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायेवरीय संवाददाता, भागलपुरपीजी व कॉलेज में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो. इसे लेकर लोकभवन के विशेष कार्य अधिकारी न्यायिक कल्पना श्रीवास्तव ने टीएमबीयू सहित सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में पत्र भेजा है. पत्र में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार को लेकर सचिवालय ने विवि प्रशासन को सख्त रुख अपनाने के लिए कहा है. शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायी जाये.लोकभवन से जारी पत्र में कहा कि पूर्णकालिक कार्यरत सभी शिक्षकों को सेमेस्टर के दौरान प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो.शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह लागू रहेगापत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यूनतम कार्यभार एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह यानी 180 कार्य दिवसों तक लागू रहेगा. साप्ताहिक 40 घंटे के कार्यभार को छह कार्य दिवसों में समान रूप से विभाजित करने का निर्देश दिया है. कहा कि यूजीसी के प्रावधानों में भी कार्यभार से संबंधित इसी तरह के मानदंड निर्धारित हैं. जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है. उनका पालन अनिवार्य है. उन मानकों को सख्ती से लागू कर बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करें.लोकभवन को मिली शिक्षकों के गायब रहने की शिकायतलोकभवन को शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत मिल रही है. अंदरखाने की मानें, तो कुछ छात्र संगठन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कॉलेज व पीजी विभागों में निर्धारित समय से पहले ही गायब रहने की शिकायत लोकभवन से की है. इसे लेकर कुलाधिपति सख्त होते दिख रहे है. ऐसे में कॉलेजों व पीजी विभाग का औचक निरीक्षण भी किया जा सकता है.ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी की नहीं होती है क्लासकॉलेज में ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी विषय की क्लास नहीं होती है. एक दिन पहले छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने एक कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता के दौरान कहा था कि एमजेसी (ऑनर्स) विषय की क्लास होती है, लेकिन एमआइसी (सब्सिडियरी) विषय की क्लास नहीं होती है. छात्र संगठन का आरोप था कि एईसी, वीएसी व एसीसी की भी क्लास भी नहीं होती है.लोकभवन के निर्देश का हो रहा पालन - शिक्षक संगठनशिक्षक संगठन भुस्टा के महासचिव प्रो जगधर मंडल ले कहा कि लोकभवन के निर्देश का पालन हो रहा है. यूजीसी के नियमानुसार कॉलेज व पीजी विभागों में पांच घंटे तक शिक्षकों रहते हैं. सारा कार्य करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. शिक्षक लोकभवन के साथ है.

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