पश्चिम चंपारण के इस इलाके का पानी सबसे शुद्ध, जांच में खुलासा- पीने के लिए सबसे बेहतर

पश्चिम चंपारण के उत्तरी इलाकों के लोगों के लिए खुशखबरी है। जिला स्तरीय जल जांच प्रयोगशाला की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यहां का पेयजल सबसे अधिक मृदुल, स्वच्छ और स्वास्थ्य के लिए अनुकूल है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पानी न केवल जलजनित बीमारियों से बचाता है, बल्कि पाचन तंत्र के लिए भी उत्तम है।

Bettiah News: पश्चिम चंपारण के नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए राहत भरी खबर है. जिला स्तरीय जल जांच प्रयोगशाला की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिले के उत्तरी इलाके का पेयजल सबसे अधिक मृदुल, स्वच्छ और स्वास्थ्य के लिए अनुकूल है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र का पानी न सिर्फ जलजनित बीमारियों से बचाव में मददगार है, बल्कि पाचन तंत्र के लिए भी बेहतर माना जाता है.

एनएबीएल से संबद्ध लैब की जांच में सामने आई रिपोर्ट

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) की एनएबीएल (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) से संबद्ध जिला जल जांच प्रयोगशाला ने जांच के बाद यह निष्कर्ष दिया है. रिपोर्ट के अनुसार नेपाल सीमा से सटे सोमेश्वर शिवालिक पहाड़ियों और वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना (वीटीआर) के आसपास के क्षेत्रों का पेयजल जिले में सबसे बेहतर गुणवत्ता वाला है.

आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसी समस्या नहीं

पीएचईडी के जिला जल जांच प्रयोगशाला के रासायनज्ञ अनिल कुमार ने बताया कि पश्चिम चंपारण बिहार के उन जिलों में शामिल है, जहां पेयजल की गुणवत्ता सामान्य रूप से अच्छी है. जांच में अधिकांश क्षेत्रों के पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसी गंभीर रासायनिक समस्याएं नहीं मिलीं, जबकि आयरन की मात्रा भी निर्धारित मानकों के भीतर पाई गई है.

इस साल 2,035 जल स्रोतों की हुई जांच

उन्होंने बताया कि सरकार ने हर महीने करीब 300 पेयजल स्रोतों की जांच का लक्ष्य तय किया है. इसी क्रम में जनवरी 2026 से अब तक 2,035 जल स्रोतों की जांच की जा चुकी है. इन जांचों के आधार पर पेयजल की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि लोगों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराया जा सके.

हर पंचायत में हो रही प्राथमिक जांच

रासायनज्ञ अनिल कुमार के अनुसार राज्य सरकार की पहल पर प्रत्येक पंचायत में एक पंप ऑपरेटर को फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) उपलब्ध कराई गई है. इसके माध्यम से गांव स्तर पर ही पानी की प्राथमिक जांच की जाती है. यदि किसी नमूने में संदेह होता है तो उसकी विस्तृत जांच जिला प्रयोगशाला में कराई जाती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय की तराई और वन क्षेत्र से जुड़े उत्तरी पश्चिम चंपारण के प्राकृतिक जल स्रोतों की शुद्धता ही इस इलाके के पेयजल को जिले में सबसे बेहतर बनाती है.

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लेखक के बारे में

By मधुकर मिश्रा

मधुकर मिश्र ने 1986 में आकाश मार्ग हिंदी दैनिक देवरिया उत्तर प्रदेश से पत्रकारिता की शुरुआत की थी. इसके बाद में दिल्ली और पटना से एक साथ प्रकाशित संध्या प्रहरी, आज, नवभारत टाइम्स में कार्य किए. इस क्रम में पश्चिम चंपारण जिला मुख्यालय बेतिया में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ रह चुके हैं. वर्तमान में बेतिया प्रभात खबर हिंदी दैनिक सह मल्टीमीडिया कार्यालय से जुड़कर कार्य कर रहे हैं.

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