Bettiah News: पश्चिम चंपारण में मत्स्य पालन अब केवल पारंपरिक व्यवसाय नहीं, बल्कि स्वरोजगार और बेहतर आमदनी का मजबूत जरिया बनता जा रहा है. मत्स्य संसाधन विभाग की विभिन्न अनुदान योजनाओं के प्रति किसानों, मत्स्य पालकों और युवाओं का उत्साह लगातार बढ़ रहा है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2026-27 के लिए तय लक्ष्य से कहीं अधिक आवेदन विभाग को प्राप्त हुए हैं. अधिकारियों का कहना है कि यह जिले में मत्स्य पालन के प्रति बढ़ती जागरूकता और लोगों के भरोसे का संकेत है.
550 के लक्ष्य के मुकाबले आए 625 आवेदन
मत्स्य संसाधन विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में विभिन्न योजनाओं के तहत कुल 550 लाभुकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. इसके मुकाबले अब तक 625 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं. इससे साफ है कि जिले के लोग सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर मत्स्य पालन के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं.
मुख्यमंत्री तालाब मत्स्यिकी विकास योजना सबसे ज्यादा लोकप्रिय
विभागीय आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक आवेदन मुख्यमंत्री तालाब मत्स्यिकी विकास योजना में आए हैं. इस योजना में 63 लाभुकों के लक्ष्य के मुकाबले 308 आवेदन प्राप्त हुए हैं.
इसके अलावा मत्स्य विविधीकरण योजना में 17 के लक्ष्य के विरुद्ध 103 आवेदन मिले हैं. इस योजना के तहत झींगा पालन और मोती पालन जैसी आधुनिक मत्स्य गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है.
वहीं मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना (सात निश्चय-2) में 6 के लक्ष्य के मुकाबले 19 आवेदन प्राप्त हुए हैं. इसके अलावा तालाब मत्स्यिकी विशेष सहायता योजना के तहत अतिपिछड़ा, पिछड़ा और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित 19 लक्ष्य के विरुद्ध 24 आवेदन मिले हैं.
विभाग के प्रचार अभियान का दिख रहा असर
जिला मत्स्य पदाधिकारी डॉ. नूतन ने बताया कि विभाग की ओर से सरकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है. इसका सकारात्मक असर अब सामने आने लगा है. बड़ी संख्या में आवेदन मिलने से स्पष्ट है कि लोग मत्स्य पालन को रोजगार और आय बढ़ाने के बेहतर विकल्प के रूप में अपना रहे हैं.
उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास है कि सभी पात्र आवेदनों का निष्पक्ष निष्पादन कर अधिक से अधिक लाभुकों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए, ताकि जिले में मत्स्य उत्पादन और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिल सके.
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