Bettiah News: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के स्नातक सत्र 2026-30 की तीसरी और चौथी मेरिट लिस्ट में कथित फर्जी कोटा के इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन एक्शन में आ गया है. छात्र कल्याण अध्यक्ष ने एमजेके महाविद्यालय और राम लखन सिंह यादव (आरएलएसवाई) महाविद्यालय के प्राचार्यों से तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
विश्वविद्यालय ने कोटा के आधार पर हुए सभी नामांकनों के दस्तावेजों की जांच कराने का निर्देश दिया है.
तीन दिन में जमा करने होंगे सभी दस्तावेज
विश्वविद्यालय के पत्र के अनुसार, दोनों महाविद्यालयों को प्राचार्य कोटा, दाता कोटा और स्टाफ कोटा के तहत हुए नामांकन से जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणित तीन-तीन प्रतियां उपलब्ध करानी होंगी.
इसके साथ संबंधित मूल दस्तावेज भी जांच के लिए प्रस्तुत करने होंगे. छात्र कल्याण अध्यक्ष ने कहा है कि सभी मूल अभिलेखों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.
फर्जी दस्तावेज मिलने पर रद्द होगा नामांकन
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान यदि किसी छात्र का कोटा या उससे जुड़े दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो संबंधित छात्र-छात्राओं का नामांकन रद्द कर दिया जाएगा.
मामले को लेकर दोनों कॉलेजों में भी जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
दोनों कॉलेजों ने बनाई जांच समिति
आरएलएसवाई महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) अभय कुमार ने बताया कि कुलपति के निर्देश पर जांच के लिए समिति गठित करने को कहा गया है.
वहीं एमजेके महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) नवल किशोर बैठा ने बताया कि विश्वविद्यालय के निर्देश के बाद कॉलेज में दो सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है.
चौथी मेरिट लिस्ट में 80 प्रतिशत से अधिक नामों पर सवाल
विश्वविद्यालय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, चौथी मेरिट लिस्ट में 80 प्रतिशत से अधिक नाम कथित रूप से विशेष कोटा के माध्यम से शामिल किए जाने का मामला सामने आया है.
आरोप है कि कुछ साइबर कैफे संचालकों और कथित छात्र नेताओं की मिलीभगत से एनसीसी, खेलकूद, कुलपति, प्राचार्य, वार्ड और दाता कोटा सहित अन्य विशेष कोटा का गलत इस्तेमाल कर मेरिट लिस्ट में नाम शामिल कराए गए.
जांच में सामने आ सकती है पूरी तस्वीर
नामांकन के लिए पहुंचे कई विद्यार्थियों के पास संबंधित कोटा से जुड़े वैध प्रमाणपत्र नहीं मिलने की बात भी सामने आई है. हालांकि इन आरोपों की पुष्टि विश्वविद्यालय की जांच के बाद ही होगी.
अब विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट पर सभी की नजर है. जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और आवश्यक होने पर संबंधित नामांकन भी रद्द किए जाएंगे.
