पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर से चंद्रप्रकाश आर्य की रिपोर्ट
Bettiah News: भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित वाल्मीकिनगर बॉर्डर की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने नई डिजिटल जांच प्रणाली लागू कर दी है. गंडक बराज से होकर भारत और नेपाल के बीच आने-जाने वाले लोगों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी.
रविवार से लागू हुई नई डिजिटल व्यवस्था
एसएसबी ने रविवार से इस नई व्यवस्था की शुरुआत कर दी है. इसके तहत सीमा पार करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का विवरण कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज किया जा रहा है. पहले लोगों की जानकारी मैनुअल रूप से रजिस्टर में दर्ज की जाती थी, लेकिन अब डिजिटल डेटा एंट्री के साथ उनके वैध पहचान पत्रों की जांच और फोटो स्कैनिंग भी की जा रही है.
आधार कार्ड के बिना नहीं मिलेगी अनुमति
गंडक बराज बीओपी के इंस्पेक्टर लोकेश बनिया ने बताया कि सीमा से आने-जाने वाले लोगों का रिकॉर्ड पहले भी रखा जाता था, लेकिन सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से इसे डिजिटल स्वरूप दिया गया है.
उन्होंने कहा कि वाल्मीकिनगर बॉर्डर से आवाजाही करने वाले प्रत्येक नागरिक को अपना मूल आधार कार्ड साथ रखना अनिवार्य होगा. आधार कार्ड के सत्यापन और आवश्यक जानकारी कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज होने के बाद ही उन्हें सीमा पार करने की अनुमति दी जाएगी.
संदिग्ध गतिविधियों पर रहेगी कड़ी नजर
एसएसबी अधिकारियों के अनुसार नई डिजिटल व्यवस्था से सीमा क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा. इससे सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद मिलेगी और सीमा पार होने वाली गतिविधियों की निगरानी पहले से अधिक मजबूत होगी.
अत्याधुनिक स्कैनर से हो रही सामानों की जांच
नई व्यवस्था के तहत बॉर्डर से गुजरने वाले लोगों के सामानों की भी अत्याधुनिक स्कैनर के माध्यम से जांच की जा रही है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी आपत्तिजनक या प्रतिबंधित वस्तु सीमा के आर-पार न ले जाई जा सके.
स्थानीय लोगों ने किया स्वागत
स्थानीय लोगों का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से सुरक्षा प्रणाली और अधिक पारदर्शी तथा मजबूत होगी. वहीं एसएसबी अधिकारियों का कहना है कि यह पहल सीमा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
