Bettiah : चंन्द्रावत नदी में जमे सिल्टेशन की नहीं हुई सफाई

बेतिया शहर के पश्चिमी क्षेत्र से निकलीं ऐतिहासिक चंन्द्रावत नदी आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को विवश हैं.

–पईन रूप धारण किया नदी, अतिक्रमण की लगीं होड़ –पानी के अभाव में खेतों में नहीं हो रही सिंचाई नौतन . बेतिया शहर के पश्चिमी क्षेत्र से निकलीं ऐतिहासिक चंन्द्रावत नदी आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को विवश हैं. नदी के पेट में दशकों से जमे सिल्टेशन की सफाई की दिशा में शासन और प्रशासन के तरफ से कोई कदम नहीं उठाया गया. परिणामस्वरूप नदी आज पईन का रूप धारण कर लिया है. सिल्टेशन जमने से नदी किनारे बसे लोग नदी की भूमि अतिक्रमण कर घर बनाने में जुटे हुए हैं. नदी में पानी की घोर किल्लत से सिचाई व्यवस्था चौपट हो गया है. साथ ही गर्मी के मौसम में माल मवेशियों को पेयजल का संकट भी बढ़ गया है. इस दिशा में स्थानीय विधायक नारायण प्रसाद ने विधानसभा और सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष नदी के जीर्णोद्धार के लिए कई बार मुद्दा उठाया, लेकिन इस दिशा में धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. नदी के दोनों किनारे बसे लोग जमीन अतिक्रमण कर बेखौफ तरीके से पक्के मकान बना रहे हैं. लेकिन प्रशासन की ओर से इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठायें जाने से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद है. करीब तीन दशक पहले नदी में सालोभर पानी रहता था. इस दौरान माल मवेशियों को पानी पिलाने और स्नान करने में लोगों को सुविधा मिलतीं थी. प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहे नदी अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को आज मजबूर हैं. बुजुर्गों का मानना है कि अगर नदी के दोनों किनारे जमीन अतिक्रमण को मुक्त कराते हुए नदी का सिल्टेशन साफ कर दिया जाए तो नदी फिर से अपनी असली स्वरूप में आ जाएगी. साथ ही ऐतिहासिक चन्द्रावत नदी का अस्तित्व को भी बचाया जा सकता है. खेद की बात है कि सरकार नदी के जीर्णोद्धार के दिशा में कोई पहल करने के पक्ष में नहीं है.

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By MADHUKAR MISHRA

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