असहाय महिला के लिए सवेरा संस्था बनी मददगार: दुकान खुलवाकर स्वरोजगार से जोड़ा

सवेरा संस्था ने असहाय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किराना और श्रृंगार की दुकान खुलवाकर स्वरोजगार की एक नई मिसाल पेश की है।

Nautan Self Employment: रोजी-रोटी की तलाश में बाहर मजदूरी करने गए पति के सात माह से लापता होने के बाद बदहाली से जूझ रही एक असहाय महिला के लिए सवेरा संस्था उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है. बैरिया बगही रतनपुर पंचायत निवासी हरि चौधरी करीब सात महीने पहले मजदूरी करने बाहर गए थे, लेकिन आज तक घर वापस नहीं लौटे. पति के लापता होने के बाद उनकी पत्नी विनिता देवी मजदूरी करके किसी तरह अपने चार मासूम बेटों का लालन-पालन कर रही थीं.

सवेरा संस्था ने बढ़ाया मदद का हाथ

कठिन परिस्थितियों के बीच सवेरा संस्था के सचिव जयप्रकाश प्रसाद और को-ऑर्डिनेटर रामेश्वर प्रसाद की नजर जब विनिता देवी पर पड़ी, तो उन्होंने उनकी दयनीय स्थिति को समझा. संस्था ने उन्हें मजदूरी के दलदल से निकालकर स्वावलंबी बनाने की दिशा में स्वरोजगार शुरू करने की सलाह दी, जिसे विनिता देवी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया.

स्वतंत्रता दिवस पर खुली किराना और श्रृंगार की दुकान

शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर संस्था के सहयोग से गांव में ही किराना एवं श्रृंगार की दुकान खुलवाकर स्वरोजगार की अनोखी पहल की गई:

  • स्वावलंबन की राह: अब विनिता देवी अपनी दुकान चलाकर सम्मानपूर्वक परिवार का खर्च चला सकेंगी.
  • बच्चों का भविष्य: मजदूरी की अनिश्चितता खत्म होने से चारों बच्चों के बेहतर भरण-पोषण और शिक्षा का मार्ग प्रशस्त हुआ है.
  • संस्था का संकल्प: सचिव जयप्रकाश प्रसाद ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में असहाय महिलाओं और पुरुषों को छोटी दुकानें खुलवाकर स्वरोजगार से जोड़ने का अभियान निरंतर जारी रहेगा.

को-ऑर्डिनेटर रामेश्वर प्रसाद ने इसे समाज के लिए अनुकरणीय पहल बताया. इस मानवीय मुहिम को सफल बनाने में समाजसेवी ओमप्रकाश जयसवाल, राजेश कुमार, सोनम कुमारी, सीमा कुमारी और रौशनी कुमारी का सराहनीय योगदान रहा. क्षेत्र में संस्था के इस कदम की चौतरफा प्रशंसा हो रही है.

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लेखक के बारे में

By राजकुमार पासवान

राजकुमार पासवान वर्ष 2001 से पश्चिम चंपारण के नौतन प्रखंड में सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. इन्होंने दस्यु सरगनाओं के आतंक, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर अपनी अलग पहचान बनाई. वर्तमान में वे प्रभात खबर से संवाददाता के रूप में जुड़े हैं.

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