Bettiah: रामकथा में गूंजा श्रीराम का आदर्श जीवन, राजन जी महाराज ने समय और धर्म का दिया संदेश

बेतिया: श्रीराम सेवा समिति के तत्वावधान में हरिवाटिका शिव मंदिर के भव्य प्रांगण में आयोजित रामकथा के तीसरे दिन भी श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला. कथा का शुभारंभ भजन-कीर्तन के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया. हरिवाटिका शिव मंदिर परिसर में तीसरे दिन भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ […]

रामकथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते कथावाचक राजन जी महाराज

बेतिया: श्रीराम सेवा समिति के तत्वावधान में हरिवाटिका शिव मंदिर के भव्य प्रांगण में आयोजित रामकथा के तीसरे दिन भी श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला. कथा का शुभारंभ भजन-कीर्तन के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया.

हरिवाटिका शिव मंदिर परिसर में तीसरे दिन भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

प्रख्यात कथावाचक राजन जी महाराज ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम अनंत हैं. जिनका न आदि ज्ञात है और न अंत, ऐसे दिव्य स्वरूप को पूरी तरह समझ पाना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि वेदों में भी संत, मंत्र, सद्ग्रंथ और परमात्मा की परीक्षा लेने को अनुचित बताया गया है.

‘आज का काम कल पर टालना जीवन को बनाता है बेकल’ – राजन जी महाराज

महाराज ने श्रद्धालुओं को समझाते हुए कहा कि मर्यादा और विद्वत मान्यता के विरुद्ध ज्ञान ग्रहण करना जीवन को विषाक्त बना देता है. उन्होंने समय के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जो व्यक्ति समय की कद्र नहीं करता, उसे अंततः दुख और पछतावा ही मिलता है.

इस संदर्भ में उन्होंने एक प्रसंग सुनाया कि जब राजा दशरथ ने श्रीराम के राज्याभिषेक के लिए गुरु वशिष्ठ से शुभ मुहूर्त पूछा, तो गुरु ने तत्काल अभिषेक करने की सलाह दी. लेकिन दशरथ ने इसे अगले दिन सूर्योदय तक टाल दिया। महाराज ने कहा कि यही “कल” आगे चलकर पूरी अयोध्या के लिए “बेकल” का कारण बन गया.

रामचरितमानस के प्रसंगों से समझाया मर्यादा, भक्ति और कर्तव्य का महत्व

राजन जी महाराज ने कहा कि श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम यूं ही नहीं कहा जाता. उन्होंने अपने जीवन में धर्म, सत्य और न्याय की मर्यादाओं को स्थापित किया. रामचरितमानस के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि 14 वर्ष के वनवास का आदेश मिलने पर भी श्रीराम तनिक भी विचलित नहीं हुए.

उन्होंने माता कैकई के प्रति श्रीराम के सम्मान का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीराम ने वनवास का आदेश मिलने पर भी माता कैकई को ‘जननी’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा, “वही पुत्र भाग्यशाली है जो माता-पिता के वचनों का पालन करता है.”

महाराज ने बताया कि माता कौशल्या ने श्रीराम को जन्म दिया, लेकिन वनवास के माध्यम से माता कैकई ने उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पुनर्जन्म दिया. यही रामचरितमानस का गूढ़ संदेश है.

कार्यक्रम का संचालन प्रशांत सौरभ ने किया। आयोजन को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष जितेंद्र तिवारी, सचिव कुंदन शांडिल्य, कोषाध्यक्ष अमरेंद्र तिवारी और सदस्य गुड्डू सिंह समेत अन्य सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही.

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By Aniket kumar

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प्रभात खबर से पहले वे राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने शुरुआती शिक्षा मुजफ्फरपुर में अंग्रेजी माध्यम से प्राप्त की और इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की.

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