तीन दिन में घर खाली करने का नोटिस, अब आशियाना उजड़ने के डर में वाल्मीकिनगर के सैकड़ों परिवार

वाल्मीकिनगर में गंडक विभाग के अतिक्रमण हटाने के नोटिस ने सैकड़ों परिवारों की नींद उड़ा दी है. तीन दिन का अल्टीमेटम मिलने से ग्रामीणों में भारी रोष है, जो दशकों से यहां बसे हुए हैं. 27 अगस्त को बुलडोजर और सुरक्षा बल के साथ कार्रवाई की आशंका से लोग खौफ में हैं.

Valmikinagar News: वाल्मीकिनगर. वाल्मीकिनगर पंचायत में गंडक विभाग की ओर से अतिक्रमण हटाने को लेकर जारी नोटिस के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है. ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों से बसे परिवारों को महज तीन दिनों का समय देकर घर खाली करने का निर्देश दिया गया है. ग्रामीणों के अनुसार, 27 अगस्त को प्रशासन की ओर से बुलडोजर और सुरक्षा बल के साथ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. इससे सैकड़ों परिवारों के सामने आशियाना उजड़ने का संकट खड़ा हो गया है.

तीन दिन में घर खाली करने के नोटिस से बढ़ी चिंता

ग्रामीणों के अनुसार, प्रभावित परिवारों को अतिक्रमण हटाने के लिए तीन दिनों का समय दिया गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई परिवार दशकों से यहां रह रहे हैं और अब अचानक घर खाली करने के निर्देश से उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है.

ग्रामीणों का दावा है कि प्रभावित परिवारों में कई ऐसे हैं, जो तीन से चार पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं.

50 से 60 वर्षों से रहने का ग्रामीणों का दावा

स्थानीय लोगों के अनुसार, कई परिवार करीब 50 से 60 वर्षों से यहां बसे हुए हैं. उनका कहना है कि उनके पास रहने के लिए दूसरी जमीन नहीं है और वर्तमान मकान ही उनका एकमात्र आशियाना है.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिना वैकल्पिक आवास की व्यवस्था के मकान हटाए गए तो महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के सामने रहने का संकट पैदा हो जाएगा.

27 अगस्त को कार्रवाई की तैयारी का दावा

ग्रामीणों के अनुसार, 27 अगस्त को प्रशासन की ओर से बुलडोजर और भारी सुरक्षा बल के साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. इस सूचना के बाद प्रभावित परिवारों में चिंता और आक्रोश बढ़ गया है.

हालांकि, ग्रामीणों ने प्रशासन से शांतिपूर्ण तरीके से मामले का समाधान निकालने की अपील की है.

पहले पुनर्वास, फिर विस्थापन की मांग

ग्रामीणों ने कहा कि वे विकास या कानून के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विस्थापन से पहले पुनर्वास की ठोस व्यवस्था होनी चाहिए.

प्रभावित परिवारों की मांग है कि भूमिहीन लोगों को पहले वैकल्पिक आवासीय जमीन उपलब्ध कराई जाए. साथ ही पक्का मकान बनाने के लिए नियमानुसार मुआवजा या पुनर्वास राशि सुनिश्चित की जाए.

‘पहले बसाने की लिखित गारंटी, फिर विस्थापन’

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि पहले बसाने की लिखित गारंटी दी जाए और उसके बाद ही विस्थापन की कार्रवाई की जाए.

उन्होंने जिला प्रशासन और गंडक विभाग से तत्काल वार्ता कर मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है.

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By Prabhat khabar news desk

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