बेतिया जल संकट: पश्चिम चंपारण में ग्रामीण इलाकों तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी संभाल रहे लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के सामने मानव संसाधन की कमी बड़ी चुनौती बन गई है. जिले में बेतिया, बगहा, नरकटियागंज और रामनगर चार अवर प्रमंडल कार्यरत हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण तकनीकी और गैर-तकनीकी पद लंबे समय से खाली हैं. इसका असर ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के निरीक्षण, तकनीकी जांच, रखरखाव और मरम्मत पर पड़ रहा है.
कार्य निरीक्षक के सभी 36 पद खाली
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले में कार्य निरीक्षक के 36 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें एक भी पद भरा नहीं है. सभी 36 पद लंबे समय से रिक्त हैं.
जलापूर्ति योजनाओं की जमीनी स्थिति की निगरानी और तकनीकी खामियों की पहचान में कार्य निरीक्षकों की अहम भूमिका होती है. ऐसे में इस पद पर एक भी कर्मी नहीं होने से योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर असर पड़ना स्वाभाविक है.
पांच कनीय अभियंता के पद भी रिक्त
कनीय अभियंताओं की स्थिति भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है. विभाग में 19 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 14 पर कर्मी तैनात हैं, जबकि पांच पद खाली हैं.
इसके अलावा अपर डिविजन क्लर्क के चारों पद रिक्त हैं. मैन सह चौकीदार के स्वीकृत पदों पर भी कोई कर्मी कार्यरत नहीं है. विभागीय परिचारी के 25 पदों में 15 पर तैनाती है और 10 पद खाली हैं. खलासी के पांच पदों में सिर्फ एक पद भरा है, जबकि चार रिक्त हैं.
शोध सहायक और प्रयोगशाला सहायक जैसे तकनीकी कार्यों से जुड़े पदों पर भी कमी बतायी गयी है. इससे विभाग के नियमित तकनीकी और फील्ड कार्यों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.
तीन साल बाद भी 47 जलापूर्ति योजनाएं बंद
वर्ष 2023 में पंचायती राज विभाग से पीएचईडी को 3490 ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं हस्तांतरित की गयी थीं. इनमें उस समय 2021 योजनाएं चालू थीं, जबकि 1459 योजनाएं बंद थीं.
इन बंद योजनाओं में 47 ऐसी थीं, जो अपूर्ण अथवा अत्यधिक क्षतिग्रस्त होने के कारण लंबे समय से बंद थीं. करीब तीन साल बीतने के बाद भी ये 47 योजनाएं पूरी तरह चालू नहीं हो सकी हैं.
विभाग ने कहा, मरम्मत की प्रक्रिया जारी
कार्यपालक अभियंता नितिन कुमार ने बताया कि बंद योजनाओं को चिह्नित कर उन्हें दुरुस्त करने की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने कहा कि विभाग में रिक्त पदों की जानकारी मुख्यालय को दी जा चुकी है.
हालांकि, ग्रामीण जलापूर्ति जैसी जरूरी सेवा में लंबे समय से तकनीकी कर्मियों की कमी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. पर्याप्त कर्मचारियों के अभाव में योजनाओं का निरीक्षण और खराब सिस्टम की मरम्मत समय पर कराना चुनौतीपूर्ण हो रहा है.
गर्मी में योजनाओं को चालू करना जरूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध और शुद्ध पेयजल की जरूरत गर्मी के दिनों में और बढ़ जाती है. ऐसे में बंद पड़ी जलापूर्ति योजनाओं को जल्द चालू करने के साथ विभाग के रिक्त महत्वपूर्ण पदों को भरना भी जरूरी है.
पीएचईडी के सामने अब दोहरी चुनौती है. एक ओर वर्षों से बंद योजनाओं को दुरुस्त कर ग्रामीणों तक पानी पहुंचाना है, वहीं दूसरी ओर पर्याप्त तकनीकी और गैर-तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था करनी है, ताकि योजनाओं का नियमित निरीक्षण और रखरखाव हो सके.
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