अजब-गजब: आपने अंतिम यात्रा तो बहुत देखी होगी, लेकिन शायद ही कभी ऐसा नजारा देखा हो. आगे-आगे अर्थी जा रही थी और पीछे आर्केस्ट्रा की धुन पर कलाकार डांस करते हुए चल रहे थे. ढोल-नगाड़ों की थाप से पूरा रास्ता गूंज रहा था. सड़क किनारे खड़े लोग कुछ देर के लिए ठिठक गए. मामला पश्चिमी चंपारण के नौतन प्रखंड के डबरिया मकरीटोला का है, जहां 108 वर्षीय छठु पटेल की अंतिम विदाई ने लोगों को हैरान कर दिया.
अंतिम यात्रा में दिखा बिल्कुल अलग नजारा
आमतौर पर अंतिम यात्रा का माहौल गमगीन होता है. परिजन और रिश्तेदार रोते-बिलखते हुए शव के साथ चलते हैं और चारों ओर सन्नाटा पसरा रहता है. लेकिन छठु पटेल की अंतिम यात्रा में तस्वीर बिल्कुल अलग थी.
अर्थी के आगे परिजन और ग्रामीण चल रहे थे, जबकि पीछे आर्केस्ट्रा का काफिला था. ढोल-नगाड़े बज रहे थे और कलाकार संगीत की धुन पर नाचते हुए आगे बढ़ रहे थे. रास्ते से गुजर रहे लोग कभी अर्थी की तरफ देखते तो कभी पीछे चल रहे आर्केस्ट्रा को देखकर हैरान रह जाते. कई लोगों ने इस पूरे नजारे को मोबाइल में रिकॉर्ड भी किया.
आखिर क्यों निकाली गई ऐसी अंतिम यात्रा?
अब सवाल उठता है कि 108 साल के बुजुर्ग की अंतिम विदाई इतनी अलग क्यों थी? दरअसल, छठु पटेल ने 108 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली. उनके पुत्र मुकेश पटेल के अनुसार, उनके पिता की इच्छा थी कि उनकी मौत के बाद घर में मातम का माहौल न हो.
वह चाहते थे कि जब वह दुनिया से विदा हों तो लोग उन्हें रोते हुए नहीं, बल्कि खुशी के साथ याद करें. पिता की इसी इच्छा को बेटे ने उनकी आखिरी इच्छा माना और अंतिम विदाई को उसी अंदाज में आयोजित किया.
बेटे ने पिता की आखिरी इच्छा पूरी की
परिवार ने अंतिम यात्रा की तैयारी की. शवयात्रा निकली तो साथ में ढोल-नगाड़ों और आर्केस्ट्रा की व्यवस्था की गई थी. जैसे ही यात्रा आगे बढ़ी, रास्ते में लोगों की नजर इस अनोखे दृश्य पर टिक गई.
आगे अर्थी और पीछे संगीत की धुन पर कलाकारों की प्रस्तुति ने अंतिम यात्रा को सामान्य शवयात्राओं से बिल्कुल अलग बना दिया. इस दौरान बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो गए.
सोशल मीडिया पर वीडियो की चर्चा
छठु पटेल की इस अनोखी अंतिम यात्रा का वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है. वीडियो देखने वाले लोग अपनी-अपनी राय दे रहे हैं. कुछ लोग इसे बुजुर्ग की इच्छा के मुताबिक दी गई अनोखी विदाई बता रहे हैं, तो कुछ इसे अंतिम संस्कार की परंपराओं से बिल्कुल अलग अंदाज मान रहे हैं.
इलाके में भी अंतिम यात्रा को लेकर चर्चा है. हालांकि परिवार का कहना है कि आर्केस्ट्रा और डांस किसी दिखावे के लिए नहीं था. यह 108 वर्षीय छठु पटेल की आखिरी इच्छा थी, जिसे उनके बेटे ने पूरा किया.
108 साल की जिंदगी और यादगार विदाई
छठु पटेल की अंतिम यात्रा ने पश्चिमी चंपारण में एक अलग तरह की तस्वीर छोड़ दी है. जहां आमतौर पर अंतिम यात्रा में आंखों से आंसू और गम का माहौल होता है, वहीं यहां ढोल-नगाड़ों की आवाज सुनाई दी.
किसी ने इस विदाई को अनोखा बताया तो किसी ने इसे असामान्य कहा. लेकिन परिवार के लिए यह अपने बुजुर्ग को उनकी इच्छा के मुताबिक दी गई आखिरी विदाई थी.
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