बेतिया (पश्चिम चंपारण): बिहार की सियासत में नई ऊर्जा भर रही निशांत कुमार की ‘सद्भाव यात्रा’ अपने दूसरे दिन और भी अधिक सक्रिय नजर आई. सोमवार को पश्चिम चंपारण की धरती पर उनके कार्यक्रमों में प्रकृति, आस्था और संगठन का एक अनूठा संगम देखने को मिला. उनकी इस यात्रा को राजनीतिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है.
प्रकृति के बीच से दिन की शुरुआत
निशांत कुमार ने अपने दिन की शुरुआत वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) के घने जंगलों में सफारी के साथ की. सफारी के माध्यम से उन्होंने न केवल क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लिया, बल्कि स्थानीय पर्यटन की संभावनाओं को भी रेखांकित किया. इसके बाद उनका काफिला वाल्मीकिनगर कन्वेंशन सेंटर पहुँचा, जहाँ उन्होंने महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए. आध्यात्मिक जुड़ाव को और प्रगाढ़ करते हुए उन्होंने ऐतिहासिक नर देवी मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया.
जदयू कार्यकर्ताओं को दिया मजबूती का मंत्र
दोपहर एक बजे बेतिया के बापू सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम इस यात्रा का मुख्य राजनीतिक केंद्र रहा. यहाँ निशांत कुमार ने जदयू कार्यकर्ताओं और जमीनी स्तर के नेताओं के साथ सीधा संवाद किया. इस दौरान उन्होंने संगठन को सशक्त बनाने और सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने पर जोर दिया. कार्यकर्ताओं में उनके संबोधन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा गया.
शाम 3:30 बजे वे सड़क मार्ग से पटना के लिए रवाना हो गए. विशेषज्ञों का मानना है कि निशांत कुमार की यह यात्रा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं है, बल्कि यह परंपरा का सम्मान करते हुए भविष्य की राजनीति के लिए संगठन को तैयार करने की एक बड़ी कवायद है.
बेतिया से अवध किशोर तिवारी की रिपोर्ट
