Bettiah News: मानसून के दौरान जंगलों से निकलकर रिहायशी इलाकों में पहुंचने वाले सांपों और बढ़ते मानव-सर्प संघर्ष को देखते हुए वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व (VTR) प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं. इसी क्रम में वन विभाग के सभागार में विशेष सर्प रेस्क्यू एवं जागरूकता प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न रेंजों के करीब 50 वनकर्मियों और अधिकारियों ने भाग लिया.
कार्यशाला का उद्देश्य वनकर्मियों को वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से सर्प रेस्क्यू के लिए प्रशिक्षित करना था, ताकि आपात स्थिति में लोगों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
वनकर्मियों को सिखाई गई सुरक्षित रेस्क्यू तकनीक
वाल्मीकिनगर के रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि अक्सर लोग डर की वजह से सांपों को मार देते हैं, जबकि अधिकांश मामलों में उन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़कर जंगल में छोड़ा जा सकता है.
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित वनकर्मी ऐसी परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से रेस्क्यू अभियान चलाकर मानव जीवन और वन्यजीवों दोनों की रक्षा कर सकते हैं.
जहरीले और गैर-जहरीले सांपों की पहचान भी कराई गई
वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) के सहयोग से लखनऊ से आए प्रशिक्षक आदित्य तिवारी ने प्रतिभागियों को वीटीआर क्षेत्र में पाए जाने वाले जहरीले और गैर-जहरीले सांपों की पहचान, उनके व्यवहार, सुरक्षित रेस्क्यू तकनीक, सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) तथा रेस्क्यू हुक और बैग के सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी.
प्रशिक्षण के दौरान लाइव डेमो के जरिए वनकर्मियों को वास्तविक परिस्थितियों में सर्प रेस्क्यू का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया.
लोगों से की गई यह अपील
कार्यशाला में मानव-सर्प संघर्ष को कम करने, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों और जनजागरूकता पर भी विशेष जोर दिया गया.
वन विभाग ने लोगों से अपील की कि यदि घर या आसपास सांप दिखाई दे तो घबराएं नहीं और उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित टीम सुरक्षित रेस्क्यू कर सके.
कार्यक्रम में एसीएफ सीएसबीके सिन्हा, फील्ड बायोलॉजिस्ट सौरभ कुमार, डब्ल्यूटीआई के पॉवेल घोष, सुनील कुमार सहित वन विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे.
