बेतिया न्यूज: गणेश चतुर्थी के मौके पर सोमवार को पूरा बेतिया गणपति भक्ति में डूबा नजर आया. शहर के अलग-अलग इलाकों में गणपति बप्पा की प्रतिमाएं स्थापित की गयीं और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गयी. गणपति बप्पा के जयकारों से पूजा स्थल गूंजते रहे. दोपहर बाद शुरू हुआ श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा.
चार स्थानों पर सजे पंडाल, आकर्षण का केंद्र बना गणपति दरबार
शहर में लाल बाजार स्थित ऐतिहासिक बेतिया राज गणेश मंदिर समेत चार प्रमुख स्थानों पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गयी. लाल बाजार के अलावा कोतवाली चौक, लादूराम गोला तथा कालीबाग बुलाकी सिंह चौक पर आकर्षक पंडाल तैयार कर गणपति की पूजा की गयी. शाम होते ही इन पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी. रोशनी और सजावट से सजे पंडालों में गणपति के दर्शन के लिए लोग परिवार के साथ पहुंचे.
बेतिया राज गणेश मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना
लाल बाजार स्थित ऐतिहासिक बेतिया राज गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी पर विशेष पूजा-अर्चना की गयी. श्री नव दुर्गा पूजा समिति के तत्वावधान में राजा सिंघानिया ने पत्नी वर्षा सिंघानिया के साथ यजमान के रूप में मुख्य पूजा संपन्न करायी. इस दौरान महेश काजरिया, नीरज चौधरी, अभय जायसवाल समेत पूजा समिति के अन्य सदस्यों ने व्यवस्था में सहयोग किया.
मंत्रोच्चार और आरती से भक्तिमय हुआ माहौल
लाल बाजार स्थित ऐतिहासिक बेतिया राज गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी पर विशेष पूजा-अर्चना की गयी. श्री नव दुर्गा पूजा समिति के तत्वावधान में राजा सिंघानिया ने पत्नी वर्षा सिंघानिया के साथ यजमान के रूप में मुख्य पूजा संपन्न करायी. इस दौरान महेश काजरिया, नीरज चौधरी, अभय जायसवाल समेत पूजा समिति के अन्य सदस्यों ने व्यवस्था में सहयोग किया.
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक दिखा उत्साह
गणेश चतुर्थी को लेकर बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला. महिलाएं भी बड़ी संख्या में पूजा स्थलों पर पहुंचीं. शाम ढलते ही पंडालों के आसपास श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गयी. देर रात तक दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा. पूजा समितियों की ओर से श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में लड्डू का वितरण किया गया.
रोशनी और सजावट ने बढ़ायी उत्सव की रौनक
शहर के विभिन्न पूजा स्थलों पर की गयी आकर्षक सजावट और रोशनी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही. रंग-बिरंगी रोशनी से सजे पंडालों में गणपति की प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही थीं. पूरे इलाके में भक्ति गीत, जयघोष और पूजा-अर्चना के कारण उत्सवी माहौल बना रहा.