पर्यटन स्थल बनने का इंतजार करती रह गई ऐतिहासिक हरदिया कोठी, अब जुआरियों का बना सुरक्षित ठिकाना

आजादी के 75 साल बाद भी नौतन की हरदिया कोठी उपेक्षा का दंश झेल रही है. कभी एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनने की उम्मीद रखने वाली यह ऐतिहासिक धरोहर अब असामाजिक तत्वों और जुआरियों का सुरक्षित ठिकाना बन गई है.

Nautan Hardiya Kothi Tourism: आजादी के पचहत्तर वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नौतन प्रखंड स्थित ऐतिहासिक ब्रिटिशकालीन हरदिया कोठी अपने उद्धार और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने की बाट जोह रही है. प्रशासनिक उदासीनता और सरकारी उपेक्षा का आलम यह है कि कभी क्षेत्र की पहचान रही यह ऐतिहासिक धरोहर इन दिनों असामाजिक तत्वों और जुआरियों का सुरक्षित ठिकाना बन चुकी है. जगदीशपुर और नौतन थाना क्षेत्र के ठीक सीमावर्ती इलाके में अवस्थित होने के बावजूद दोनों थानों की पुलिस यहां सक्रिय जुआरियों के विरुद्ध किसी ठोस कार्रवाई को अंजाम देने में नाकाम साबित हो रही है, जिससे इस ऐतिहासिक स्थल की गरिमा तार-तार हो रही है.

पर्यटन स्थल का बाट जोह रहा हरदिया कोठी

पर्यटन विभाग की जांच के बाद भी ठंडे बस्ते में गई योजना

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में स्थानीय विधायक सह पूर्व पर्यटन मंत्री नारायण प्रसाद ने हरदिया कोठी के संरक्षण और इसे एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग को विधानसभा सदन में प्रमुखता से उठाया था. पूर्व मंत्री की विशेष पहल और अपील पर पर्यटन विभाग की उच्चस्तरीय टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थल निरीक्षण किया था तथा सरकार को सकारात्मक रिपोर्ट भी सौंपी थी. विभाग की टीम आने से क्षेत्रवासियों में कोठी के जीर्णोद्धार और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की प्रबल उम्मीद जगी थी, लेकिन समय बीतने के साथ यह योजना फाइलों और ठंडे बस्ते में सिमट कर रह गई. इसके चलते कोठी की प्राचीन इमारत दिन-प्रतिदिन जर्जर होकर ढहने की कगार पर पहुंचती जा रही है.

वीराने का फायदा उठा रहे जुआरी, स्थानीय ग्रामीणों में भारी असंतोष

पंचायत के मुखिया अफरोज नैयर ने मामले पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि सुनसान और एकांत जगह होने का गलत फायदा उठाकर यहां दिनभर जुए की महफिलें सजती हैं. दूर-दराज से आने वाले जुआरी बेखौफ होकर ताश के पत्तों पर दांव लगाते हैं. हरदिया कोठी परिसर में जुआरियों का जमावड़ा रहने से कोठी से सटे मन (प्राकृतिक झील) में मछली पकड़ने वाले स्थानीय मछुआरों और आसपास के ग्रामीणों में भय और असंतोष का माहौल व्याप्त है. मुखिया ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार समय रहते इस ऐतिहासिक स्थल का सौंदर्यीकरण कर इसे पर्यटन क्षेत्र का दर्जा दे देती, तो स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार मिलने के साथ-साथ सरकार को भी राजस्व का बड़ा लाभ प्राप्त होता.

1 जनवरी को जुटती है भारी भीड़, प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग

स्थानीय निवासियों का कहना है कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण हरदिया कोठी में प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी को जिले के विभिन्न कोनों से हजारों की संख्या में लोग पिकनिक मनाने पहुंचते हैं. स्थानीय विधायक नारायण प्रसाद और मुखिया अफरोज नैयर ने संयुक्त रूप से जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारियों से अपील की है कि वे हरदिया कोठी में चल रहे अवैध जुए के अड्डों पर तुरंत छापेमारी कर जुआरियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करें. साथ ही ऐतिहासिक धरोहर के अस्तित्व को बचाने के लिए इसके संरक्षण और पर्यटन विकास की दिशा में अविलंब ठोस कदम उठाए जाएं.


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लेखक के बारे में

By राजकुमार पासवान

राजकुमार पासवान वर्ष 2001 से पश्चिम चंपारण के नौतन प्रखंड में सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. इन्होंने दस्यु सरगनाओं के आतंक, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर अपनी अलग पहचान बनाई. वर्तमान में वे प्रभात खबर से संवाददाता के रूप में जुड़े हैं.

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