46 साल से इंतजार खत्म कब होगा? संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों ने सरकार से लगाई गुहार

वित्तहित संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक 46 वर्षों से सरकारी मान्यता, वित्तीय सहायता और वेतन भुगतान की मांग को लेकर सरकार से गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने संस्कृत शिक्षा के संरक्षण पर जोर दिया और जल्द सकारात्मक निर्णय की उम्मीद जताई है।

Bettiah News: बेतिया के राज देवरी परिसर मंदिर में बिहार राज्य के प्रस्तावित वित्तरहित संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की बैठक आयोजित की गई. बैठक में वर्षों से लंबित मान्यता, वित्तीय सहायता और शिक्षकों के वेतन भुगतान के मुद्दे पर सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग उठाई गई.

बैठक की अध्यक्षता प्रेमचंद राम ने की. इसमें बड़ी संख्या में शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी शामिल हुए.

वर्षों से लंबित हैं शिक्षकों की मांगें

बिहार राज्य संस्कृत शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारी जिला संघ के अध्यक्ष सुदामा द्विवेदी ने कहा कि वर्ष 1980-81 से स्थापित कई वित्तरहित संस्कृत विद्यालय आज भी सरकारी मान्यता और वित्तीय सहायता के अभाव में कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि अलग-अलग सरकारों ने समय-समय पर आश्वासन तो दिए, लेकिन अब तक इन विद्यालयों और शिक्षकों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है.

संस्कृत शिक्षा के संरक्षण पर दिया जोर

सुदामा द्विवेदी ने कहा कि संस्कृत भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की आधारभूत भाषा है. इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार को प्रभावी नीति बनानी चाहिए, ताकि संस्कृत शिक्षा को मजबूती मिल सके और इससे जुड़े शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो.

संघ ने सरकार से क्या मांग की?

बैठक में वक्ताओं ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड से वर्षों से लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करने की मांग की.

संघ ने वित्तरहित संस्कृत विद्यालयों को सरकारी मान्यता देने, वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने तथा शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर ठोस निर्णय लेने की अपील की.

नेताओं के प्रयासों का किया उल्लेख

बैठक में सुदामा द्विवेदी ने बताया कि प्रांतीय नेता नागेंद्र शुक्ला, प्रांतीय संयुक्त सचिव अनुजेश कुमार और प्रांतीय नेता कोमल पांडे सहित अन्य संघीय पदाधिकारी भी समय-समय पर सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करते रहे हैं.

बैठक के अंत में शिक्षकों ने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर वर्षों से लंबित मांगों का समाधान करेगी और संस्कृत शिक्षा को मजबूती देने की दिशा में प्रभावी कदम उठाएगी.


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By Madhukar mishra

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