बृजेश दास हत्याकांड में चुमन यादव दोषी, कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा

बगहा व्यवहार न्यायालय ने 26 साल पुराने हत्याकांड में कुख्यात दस्यु सरगना चुमन यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है.

Bagaha News: बगहा. चौतरवा थाना क्षेत्र में करीब 26 वर्ष पुराने हत्याकांड में बगहा व्यवहार न्यायालय ने कुख्यात दस्यु सरगना चुमन यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय रविरंजन की अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया. अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

पूर्व कुख्यात दस्यु सरगना चुमन यादव के साथ पुलिस व एपीपी कमलेश शर्मा | Prabhat Khabar Network

कुश्ती के अखाड़े के पास युवक की हुई थी हत्या

मामला चौतरवा थाना कांड संख्या 106/2000 से जुड़ा है. अपर लोक अभियोजक कमलेश शर्मा ने बताया कि मृतक बृजेश दास के पिता अदालत दास ने चौतरवा थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. प्राथमिकी के अनुसार, बगीचा स्थित कुश्ती के अखाड़े के पास चुमन यादव समेत अन्य लोगों ने बृजेश दास को पकड़ लिया था.

गमछे से बांधकर दोनाली बंदूक से मारी थी गोली

अभियोजन के अनुसार, आरोपितों ने बृजेश दास का हाथ गमछे से बांध दिया था. इसके बाद दोनाली बंदूक से गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गयी. घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गयी थी. पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की और आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया.

अदालत में 12 गवाहों के बयान दर्ज

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 12 गवाहों के बयान दर्ज कराये गये. अदालत ने गवाहों की गवाही, उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया. इसके बाद जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय रविरंजन की अदालत ने चुमन यादव को हत्या के मामले में दोषी करार दिया.

आर्म्स एक्ट में भी सुनायी गयी सजा

अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत चुमन यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनायी. इसके साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया. अर्थदंड जमा नहीं करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. अदालत ने मामले में आर्म्स एक्ट के तहत भी सजा सुनायी है. करीब 26 साल पुराने इस मामले में आये फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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By Israel ansari

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