West Champaran News: नौतन में बाल श्रम मुक्त समुदाय सीएलएफसी कार्यक्रम के तहत सवेरा संस्था ने बाल श्रम और मानव तस्करी की रोकथाम के लिए कमजोर एवं जोखिमग्रस्त परिवारों के साथ धरातल पर काम शुरू किया है. संस्था का प्रयास है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, खासकर विधवा एवं एकल महिलाओं को आजीविका के साधन उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाया जाए, ताकि आर्थिक मजबूरी के कारण बच्चों को बाल श्रम में जाने से रोका जा सके और उनकी पढ़ाई जारी रह सके.
Nautan News: विधवा और एकल महिलाओं को आजीविका से जोड़ने की पहल
संस्था के सचिव जयप्रकाश प्रसाद ने बताया कि सवेरा संस्था विशेष रूप से विधवा एवं एकल महिला परिवारों की पहचान कर उन्हें आजीविका के साधन उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है. इसके साथ ही महिलाओं को नियमित सहयोग देने और सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से बच्चों को काम करने के लिए मजबूर होने की संभावना कम होगी और वे अपनी शिक्षा जारी रख सकेंगे.
पिछले वर्ष छह महिलाओं को मिला आजीविका सहयोग
जयप्रकाश प्रसाद ने बताया कि पिछले वर्ष पायलट पहल के तहत छह महिलाओं को आजीविका सहयोग उपलब्ध कराया गया था. इसमें बकरी पालन जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया गया. संस्था का कहना है कि इस तरह के प्रयासों से परिवारों की आय बढ़ाने और बच्चों को बाल श्रम से बाहर रखने में मदद मिली.
दिव्यांग बच्चे की मां को दी सिलाई मशीन
इसी पहल के तहत एक ऐसी महिला को सिलाई मशीन उपलब्ध कराई गई, जिनका बच्चा शारीरिक रूप से दिव्यांग है. सिलाई मशीन मिलने के बाद महिला ने सिलाई का काम शुरू किया और इससे अपनी आय अर्जित कर परिवार के खर्च में सहयोग करने लगीं.
संस्था के अनुसार इस तरह की सहायता महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ परिवार की आर्थिक मजबूती में भी मदद करती है.
छोटी दुकान शुरू करने के लिए भी दिया सहयोग
सीएलएफसी कार्यक्रम के तहत श्रीमती विनीता देवी, चिंता देवी आदि महिलाओं को छोटी दुकान शुरू करने के लिए भी सहयोग प्रदान किया गया. उद्देश्य उन्हें नियमित आय का साधन उपलब्ध कराना और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है.
संस्था का मानना है कि महिलाओं की आय बढ़ने से बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देने और उन्हें बाल श्रम से दूर रखने में मदद मिलेगी.
बाल श्रम मुक्त समाज बनाने का प्रयास जारी
सवेरा संस्था ने कहा कि बाल श्रम एवं मानव तस्करी की रोकथाम के लिए केवल बच्चों को काम से बाहर निकालना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना भी जरूरी है. इसी सोच के साथ संस्था आजीविका सहयोग, सरकारी योजनाओं से जुड़ाव और जागरूकता के माध्यम से बाल श्रम मुक्त समाज बनाने की दिशा में काम कर रही है.
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