बेतिया: जमाबंदी घोटाले में बड़ा खुलासा, 14 जमाबंदियों के रिकॉर्ड गायब, पूर्व सीओ समेत दोषियों पर होगी कार्रवाई

पश्चिम चम्पारण के चनपटिया अंचल में जमाबंदी परिमार्जन घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. 14 जमाबंदियों के रिकॉर्ड गायब मिले हैं, जबकि कई मामलों में बिना वैध दस्तावेज के नाम परिवर्तन किए जाने की बात सामने आई है. डीएम ने दोषियों पर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. पढ़ें पूरी खबर..

बेतिया से अवध किशोर तिवारी की रिपोर्ट

Bettiah News: पश्चिम चम्पारण के चनपटिया अंचल में जमाबंदी परिमार्जन के नाम पर हुए कथित खेल का बड़ा खुलासा हुआ है. जिला प्रशासन की जांच में सामने आया है कि कई जमाबंदियों में बिना वैध अभिलेखीय आधार के मूल रैयतों के नाम हटाकर दूसरे लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए. इतना ही नहीं, जांच के दौरान 14 जमाबंदियों से जुड़े महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों के पन्ने फटे हुए अथवा गायब पाए गए, जिससे पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

मामले की जांच के बाद जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह ने दोषी पदाधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है.

परिवाद से शुरू हुई जांच, सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

चनपटिया अंचल के लक्ष्मीपुर निवासी स्वर्गीय अनिल कुमार सिंह के पुत्र कुमार स्कंद ने जिला पदाधिकारी को आवेदन देकर आरोप लगाया था कि चनपटिया अंचल कार्यालय में परिमार्जन पोर्टल का दुरुपयोग कर 16 जमाबंदियों में मूल रैयतों के नाम, खाता और अन्य विवरण बदल दिए गए हैं.

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम के आदेश पर भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) बेतिया सदर की अध्यक्षता में त्रिसदस्यीय जांच समिति गठित की गई. समिति ने 8 जनवरी 2026 को राजस्व अभिलेखों, रजिस्टर-2 और अन्य दस्तावेजों की जांच की.

बिना दस्तावेज के बदले गए नाम

जांच रिपोर्ट में पाया गया कि कई जमाबंदियों में मूल रैयतों के नाम हटाकर प्रदीप कुमार सिंह समेत अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिए गए, जबकि इसके समर्थन में कोई वैध अभिलेखीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं था. समिति ने माना कि परिमार्जन की प्रक्रिया स्थापित नियमों के अनुरूप नहीं अपनाई गई और कई मामलों में प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

14 जमाबंदियों के रिकॉर्ड गायब, बढ़ा संदेह

जांच के दौरान सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि 14 विवादित जमाबंदियों से संबंधित रजिस्टर-2 के पन्ने फटे हुए या गायब मिले. कुछ मामलों में मूल रैयतों के नाम काटे जाने और बाद में संशोधन किए जाने के संकेत भी मिले हैं. समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रिकॉर्ड की यह स्थिति पूरे प्रकरण को अत्यंत संदिग्ध बनाती है और संबंधित अधिकारियों तथा कर्मचारियों की भूमिका की गहन जांच आवश्यक है.

पूर्व सीओ के कार्यकाल में हुए परिमार्जन

वर्तमान अंचलाधिकारी ने जांच समिति को बताया कि उन्होंने 27 फरवरी 2024 को चनपटिया अंचल का प्रभार संभाला था. विवादित सभी परिमार्जन उनके पूर्ववर्ती अंचलाधिकारी राकेश कुमार के कार्यकाल में किए गए थे.

रिपोर्ट में उल्लेख है कि तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा पर्याप्त अभिलेखीय प्रमाण के बिना केवल आरओआर (अधिकार अभिलेख) के आधार पर परिमार्जन की स्वीकृति दी गई, जो नियमसंगत नहीं माना जा सकता.

डीएम ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह ने अपर समाहर्ता को निर्देश दिया है कि दोषी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जाए. साथ ही कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने को कहा गया है.

राजस्व प्रशासन में मचा हड़कंप

जमाबंदी परिमार्जन से जुड़े इस मामले ने जिले में राजस्व अभिलेखों की सुरक्षा, रिकॉर्ड प्रबंधन और ऑनलाइन परिमार्जन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यदि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ती है तो यह पश्चिम चम्पारण के राजस्व प्रशासन से जुड़े हाल के वर्षों के सबसे बड़े और चर्चित मामलों में शामिल हो सकता है.

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By Sarfaraz Ahmad

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