Bettiah: हरिवाटिका शिव मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा का बुधवार को भव्य समापन हुआ. कोलकाता से पधारे कथावाचक संत राजन जी महाराज के श्रीमुख से कथा श्रवण के लिए चंपारण के विभिन्न क्षेत्रों के साथ नेपाल से भी हजारों श्रद्धालु पहुंचे.
अंतिम दिन कथा का आयोजन सुबह 10 बजे से शुरू होकर दोपहर करीब एक बजे तक चला. इस दौरान सुंदर कांड, लंका कांड और उत्तर कांड का विस्तार से वर्णन किया गया. श्रद्धालु घंटों कथा में भावविभोर होकर डूबे रहे.
प्रेम और सद्भाव को बताया रामराज्य का आधार
कथा के दौरान राजन जी महाराज ने कहा कि जहां प्रेम और सद्भाव है, वहीं रामराज्य की स्थापना होती है. उन्होंने कहा कि धर्म भारत का प्राण तत्व है, लेकिन जाति और राजनीति के लोभ ने धर्म की मूल धारणा को बदल दिया है. उन्होंने आचार, विचार और व्यवहार की शुद्धता को धर्म का आधार बताया.
सुंदर कांड से उत्तर कांड तक कथा का विस्तार
महाराज ने नल-नील द्वारा समुद्र पर पुल निर्माण का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी किया गया श्रेष्ठ कार्य व्यक्ति को महान बनाता है. उन्होंने भक्ति की महत्ता बताते हुए कहा कि भगवान को समर्पित भाव से किया गया हर कार्य अंततः आशीर्वाद के रूप में लौटता है.
चंपारण और नेपाल से पहुंचे हजारों श्रद्धालु
समापन के अवसर पर राजन जी महाराज ने चंपारण आगमन को अपना सौभाग्य बताया और आयोजक श्रीराम सेवा समिति का आभार व्यक्त किया. समिति के अध्यक्ष जितेंद्र तिवारी और सचिव कुंदन शांडिल्य ने भी आभार प्रकट किया. कार्यक्रम के अंत में मंच संचालक प्रशांत सौरभ ने सभी श्रद्धालुओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कथा समापन की घोषणा की.
(संवाद संकलन: रवि ‘रंक’, बेतिया)
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