बेतिया: समय पर दाखिल-खारिज न होने से अटके बैंक लोन, राजस्व कर्मियों की लापरवाही पर भड़का जनता का गुस्सा

Bettiah News: पश्चिम चम्पारण के 18 अंचलों में दाखिल-खारिज के 8,997 मामले लंबित. चनपटिया और बेतिया में सबसे ज्यादा पेंडेंसी. 1,157 आवेदन 120 दिनों से अटके, रैयतों में भारी आक्रोश. जानिए खबर विस्तार से…

 Bettiah News: पश्चिम चम्पारण जिले में भूमि सुधार और डिजिटल गवर्नेंस के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत काफी चिंताजनक नजर आ रही है. जिले में दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) और परिमार्जन मामलों के निष्पादन की कछुआ चाल से रैयत और आम उपभोक्ता बेहद परेशान हैं. जिले के कुल 18 अंचलों (ब्लॉक) की ताजा आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, म्यूटेशन के कुल 11 हजार 911 मामले विचाराधीन थे, जिनमें से महज 2 हजार 914 मामलों का ही निष्पादन (निपटारा) किया जा सका है. शेष 8 हजार 997 मामले अब भी विभिन्न स्तरों पर लंबित पड़े हैं. सबसे गंभीर स्थिति यह है कि इनमें से 1 हजार 157 आवेदन ऐसे हैं जो 120 दिनों (4 महीने) से भी अधिक समय से अंचल अधिकारियों के रडार पर अटके हुए हैं.

फाइलों की नहीं बढ़ रही रफ्तार

विभागीय आंकड़ों की बारिकी से समीक्षा करने पर पता चलता है कि जिले के कुछ खास अंचलों में म्यूटेशन की पेंडेंसी का पहाड़ खड़ा हो गया है:

  • कुल पेंडेंसी में टॉप अंचल: चनपटिया अंचल में सबसे अधिक 1,172 मामले लंबित हैं. इसके बाद जिला मुख्यालय बेतिया सदर (880), मझौलिया (748), पिपरासी (727), नरकटियागंज (700) और सिकटा (663) का नंबर आता है.
  • 120 दिनों से अधिक समय से डंप मामले: समय सीमा पार कर चुके 4 महीने से पुराने मामलों में बेतिया सदर अंचल 279 आवेदनों के साथ सबसे आगे है. इसके बाद क्रमश: चनपटिया (106), बगहा-1 (78), मझौलिया (77), लौरिया (67) और नौतन (60) का स्थान है.

अंचल कार्यालयों के चक्कर काट रहे लोग

रैयतों और पीड़ित आवेदकों का खुला आरोप है कि म्यूटेशन और परिमार्जन को ऑनलाइन करने के बावजूद बिचौलियों का बोलबाला और राजस्व कर्मियों (कर्मचारी व अंचल निरीक्षक) की मनमानी कम नहीं हुई है. लोगों को अपने ही वैध कागजातों की मंजूरी के लिए महीनों अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं.

समय पर दाखिल-खारिज और शुद्धि पत्र न मिलने के कारण आम जनता को निम्नलिखित गंभीर संकटों का सामना करना पड़ रहा है:

  • ऋण और योजनाएं ठप: जमीन के वैध कागजात (एलपीसी/रसीद) अप-टू-डेट न होने से बैंकों से मिलने वाला कृषि, व्यवसाय या होम लोन पूरी तरह रुक गया है.
  • विवाद और सरकारी लाभ: जमीन की खरीद-बिक्री के साथ-साथ विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और मुआवजा राशि का लाभ लेने से रैयत वंचित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में भूमि विवाद के नए मामले भी जनम ले रहे हैं.

समीक्षा बैठकों का नहीं दिख रहा असर

हालांकि, पश्चिम चम्पारण जिला प्रशासन और वरीय राजस्व अधिकारियों द्वारा हर हफ्ते समाहरणालय में नियमित समीक्षा बैठकें की जा रही हैं और अंचलाधिकारियों (CO) को कड़े दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं. बावजूद इसके, इतनी बड़ी संख्या में लंबित मामले सीधे तौर पर प्रशासनिक शिथिलता और व्यवस्था की धीमी रफ्तार को उजागर कर रहे हैं.

त्रस्त नागरिकों ने जिलाधिकारी (DM) से गुहार लगाई है कि म्यूटेशन के इन मामलों की जांच के लिए एक विशेष टास्क फोर्स या अंचलवार विशेष समीक्षा टीम गठित की जाए, ताकि समय सीमा से अधिक दिन तक फाइलों को दबाकर रखने वाले दागी राजस्व कर्मचारियों और अधिकारियों को चिन्हित कर उनकी जवाबदेही तय की जा सके और उनके खिलाफ सख्त विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई की जा सके.

बेतिया से अवध किशोर तिवारी की रिपोर्ट

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Published by: Purushottam Kumar

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