Bettiah News: आम के इस सीजन में पश्चिम बंगाल का सुप्रसिद्ध ‘हिमसागर’ आम लंबे समय से लोगों की पहली पसंद बना हुआ था, लेकिन अब चम्पारण के ‘जर्दा’ और ‘सबुजा’ आम ने बाजार में अपनी कड़क और मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है. नरकटियागंज की मुख्य फल मंडियों में इन दिनों स्थानीय और देसी आमों की आवक बढ़ने के साथ ही खरीदारों का रुझान भी तेजी से जर्दा और सबुजा की ओर बढ़ रहा है, जिससे चम्पारण का आम बंगाल के आम को कड़ी टक्कर दे रहा है.
स्वाद और ताजगी के आगे हिमसागर पड़ा फीका
कीमतों और स्वाद के गणित पर बात करें तो मंडी में जहां पश्चिम बंगाल से आने वाला हिमसागर आम करीब 100 रुपये में दो किलो (यानी 50 रुपये प्रति किलो) के भाव पर बिक रहा है, वहीं चम्पारण का जर्दा आम 80 रुपये प्रति किलो और सबुजा आम 60 रुपये प्रति किलो के कड़े भाव से बिक रहा है. दाम थोड़े अधिक होने के बावजूद अपनी बेजोड़ मिठास, बेहतरीन स्वाद और सीधे बागानों से आने वाली ताजगी के कारण स्थानीय खरीदार अब बाहरी आमों की तुलना में बिहार के अपने देसी आमों को ज्यादा प्राथमिकता देने लगे हैं.
सबुजा आम की एंट्री से बदला बाजार का रुख
मंडी के प्रमुख फल विक्रेता कृष्णा, धर्मेंद्र कुमार, रविन्द्र खटीक और मनोज साह बताते हैं कि कुछ दिन पहले तक पश्चिम बंगाल से आने वाले हिमसागर आम की बिक्री और मांग काफी अधिक थी; लेकिन जैसे ही चम्पारण के बागानों से जर्दा और सबुजा आम की कड़ाई से एंट्री हुई है, बाजार का पूरा रुख ही बदल गया है. स्थानीय आमों की प्रचुर आवक बढ़ने से फल मंडियों में भारी रौनक लौट आई है और ग्राहकों को भी बिना केमिकल वाले ताजे फल आसानी से मिल रहे हैं, जिससे दुकानदारों की चांदी कट रही है.
सेहत के लिए है वरदान
इधर, चिकित्सकों ने भी आम के शौकीनों को कड़ा परामर्श देते हुए कहा है कि स्वाद के साथ-साथ आम स्वास्थ्य के लिए भी बेहद गुणकारी और लाभकारी है. अनुमंडलीय अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी सह वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. गोविंद चन्द्र शुक्ल के अनुसार, पके हुए ताजे आमों में विटामिन-ए, विटामिन-सी, फाइबर और प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं.
शरीर को मिलती है ऊर्जा
यह मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाने, आंखों की रोशनी को बेहतर करने और हमारे पाचन तंत्र को कड़ाई से मजबूत बनाने में सीधे तौर पर मदद करता है. डॉ. शुक्ल ने किसानों और आम लोगों को सलाह देते हुए कहा कि संतुलित मात्रा में आम का सेवन इस चिलचिलाती गर्मी के मौसम में शरीर को तुरंत कड़क ऊर्जा प्रदान करता है और शरीर में कई आवश्यक पोषक तत्वों की कमी को आसानी से पूरा करता है.
स्थानीय किसानों की बढ़ी आय
स्थानीय बागानों से टूटकर सीधे बाजार और ग्राहकों की थाली तक पहुंच रहे जर्दा और सबुजा आम न केवल चम्पारण के अन्नदाताओं और बागवानों के लिए बेहतर आय व मुनाफे का एक कड़ा माध्यम बन रहे हैं, बल्कि यह चम्पारण की कृषि पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती दे रहे हैं. चम्पारण के इस फल उत्पादन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं. ऐसे में, इस बार नरकटियागंज के आम बाजार में बंगाल के हिमसागर और बिहार के जर्दा-सबुजा के बीच स्वाद और रसीली प्रतिस्पर्धा का कड़ा व दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है, जिसमें बिहारी आम भारी पड़ता दिख रहा है.
बेतिया के नरकटियागंज से सतीश कुमार पांडेय
