Bettiah News: गन्ना उद्योग विभाग, बिहार सरकार के आयुक्त अनिल झा के निर्देश पर शुक्रवार को नरकटियागंज चीनी मिल परिसर में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. ‘गन्ना खेती में यंत्रीकरण एवं कस्टम हायरिंग सेंटर (एटीएसपीएस के संचालन)’ विषय पर आधारित इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और कम लागत में अधिक गन्ना उत्पादन के लिए प्रेरित करना था.
यंत्रीकरण समय की मांग, घटेगी लागत और बढ़ेगा उत्पादन
सेमिनार में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के निदेशक डॉ. देवेंद्र सिंह ने कहा कि गन्ना खेती में यंत्रीकरण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है. आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से न सिर्फ खेती की लागत घटेगी और श्रम पर निर्भरता कम होगी, बल्कि उत्पादकता में भी भारी वृद्धि होगी. बिहार वैज्ञानिक पद्धति को अपनाकर देश में गन्ना उत्पादन का एक नया मॉडल राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
वैज्ञानिकों ने दी आधुनिक रोपण और फसल प्रबंधन की जानकारी
कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर के वैज्ञानिक डॉ. सुभाष चंद्र, डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह, डॉ. चेलपुरी रामुलु और केवीके नरकटियागंज के वैज्ञानिक डॉ. रतुल राम ने किसानों को आधुनिक गन्ना रोपण, उन्नत सिंचाई, मशीन आधारित कटाई तथा वैज्ञानिक फसल प्रबंधन की बारीकियों से अवगत कराया. पटना मुख्यालय से आए गन्ना उद्योग विभाग के सहायक निदेशक (एग्रोनॉमी) गौतम कुमार पटेल ने विभागीय योजनाओं और कस्टम हायरिंग सेंटर पर मिलने वाले अनुदानों की विस्तृत जानकारी दी.
किसानों की तरक्की से ही मजबूत होगा चीनी उद्योग
नरकटियागंज चीनी मिल के कार्यपालक अध्यक्ष रविंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किए बिना चीनी उद्योग का विकास संभव नहीं है. मिल प्रबंधन और सरकार मिलकर किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए बेहतर बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और आधुनिक मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करा रहे हैं. डिप्टी यूनिट हेड राजीव कुमार त्यागी और प्रैगमैटिक्स के निदेशक डॉ. बादल ने भी यंत्रीकरण को खेती का भविष्य बताते हुए एटीएसपीएस प्रतिनिधियों से किसानों की व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने की अपील की.
बेतिया के नरकटियागंज से सतीश कुमार पांडेय की रिपोर्ट
