Bettiah News: गोपालगंज सीमावर्ती नौतन प्रखंड की मंगलपुर कला पंचायत के वार्ड छह स्थित बरियारपुर गांव के बच्चों को स्थापना के 18 साल बीत जाने के बाद भी अपने गांव में एक अदद स्कूल भवन नसीब नहीं हो सका है. वर्ष 2007 में स्थापित यह प्राथमिक विद्यालय आज भी लगभग चार किलोमीटर दूर मंगलपुर गुदरिया के सरकारी भवन में टैग होकर संचालित हो रहा है. नन्हें-मुन्ने बच्चों को व्यस्त मुख्य सड़क से होकर रोजाना स्कूल जाना पड़ता है, जिससे हमेशा सड़क हादसे का खतरा बना रहता है.
Nautan News: झोपड़ी से हुई थी शुरुआत, कटाव के बाद खुले आसमान में चली कक्षाएं
दियारा क्षेत्र के बच्चों को उनके अपने गांव में प्राथमिक शिक्षा सुलभ कराने के उद्देश्य से वर्ष 2007 में इस विद्यालय की स्थापना की गई थी.
शुरुआती दौर में ग्रामीणों के सहयोग से फूस की झोपड़ी बनाकर पठन-पाठन शुरू किया गया. बाद में नदी के कटाव में झोपड़ी भी विलीन हो गई और बच्चों को खुले आसमान के नीचे बैठना पड़ा. बारिश और तेज धूप के दिनों में शिक्षकों व बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था.
2013 में मंगलपुर गुदरिया के विद्यालय में किया गया टैग
ग्रामीणों की लगातार मांग और बच्चों की परेशानी को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर वर्ष 2013 में इस विद्यालय को चार किलोमीटर दूर मंगलपुर गुदरिया के सरकारी विद्यालय भवन में टैग कर दिया गया.
तभी से बरियारपुर के छोटे-छोटे मासूम बच्चे प्रतिदिन लंबी दूरी तय कर जान जोखिम में डालते हुए स्कूल जाने को विवश हैं.
10 डिसमिल जमीन मिलने के बाद भी नहीं शुरू हुआ निर्माण कार्य
पूर्व जिला पार्षद नारद पांडेय और स्थानीय मुखिया राजेश पांडेय के अथक प्रयासों के बाद नौतन अंचल कार्यालय द्वारा विद्यालय के लिए खाता संख्या 178, खेसरा 895 में 10 डिसमिल जमीन विधिवत आवंटित की गई.
जमीन उपलब्ध होने के बावजूद वर्षों से भवन निर्माण का कार्य अधर में लटका हुआ है. पूर्व जिला पार्षद नारद पांडेय ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी शिक्षा ढांचे के सरकारी दावे बरियारपुर में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं.
160 बच्चे नामांकित, कई अभिभावक दूरी के डर से नहीं भेज रहे स्कूल
विद्यालय के प्रधान शिक्षक वीर पासवान ने बताया कि विद्यालय में कुल 160 बच्चे नामांकित हैं. शिक्षक नंदकिशोर प्रसाद, चंद्र किशोर गिरी, सुरेश साह और टोला सेवक जितेंद्र भारती बच्चों को पढ़ाने में लगातार सहयोग कर रहे हैं.
दूरी और सड़क दुर्घटना के भय से कई अभिभावक छोटे बच्चों को स्कूल भेजने से कतराते हैं, जिससे वे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं. एचएम ने स्पष्ट किया कि भवन निर्माण हेतु वरीय पदाधिकारियों को कई बार लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है.
