बगहा से इजरायल अंसारी की रिपोर्ट
Bagaha News: पर्यावरण संरक्षण के नाम पर सरकारी स्तर पर लाखों रुपये खर्च कर पौधारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन बगहा में विकास कार्यों की आड़ में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का एक गंभीर मामला सामने आया है. त्रिवेणी नहर की शाखा पटहेरा उप-वितरणी की सफाई के दौरान सेमरा से यमुनापुरधिरौली तक लगभग 8-9 किलोमीटर के दायरे में हजारों छोटे-बड़े पेड़ काटे जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है. ग्रामीणों का कहना है कि नहर सफाई के नाम पर हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काटकर उनकी अवैध बिक्री की जा रही है.
मनरेगा के तहत लगाए गए थे पौधे, ठेकेदारों पर अवैध कटाई का आरोप
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सफाई कार्य में लगे ठेकेदार और मेठों द्वारा नहर की जद में आने वाले पेड़ों के साथ-साथ आसपास के हरे-भरे पेड़ों को भी काटा जा रहा है. मौके पर मौजूद मेठ अरविंद चौधरी और गुड्डू अंसारी ने बताया कि उन्हें करीब साढ़े सात किलोमीटर लंबी नहर की सफाई की जिम्मेदारी मिली है और विभागीय निर्देश के तहत ही पेड़ हटाए जा रहे हैं. वहीं ग्रामीण शशि दुबे, पिंटू श्रीवास्तव और मुन्ना कुमार ने आरोप लगाया कि काटे गए पेड़ों में बड़ी संख्या मनरेगा योजना के तहत लगाए गए पौधों की है, जिन पर सरकार ने लाखों रुपये खर्च किए थे. ग्रामीणों का कहना है कि आम जनता के लिए पेड़ काटने पर कड़े नियम हैं, लेकिन यहाँ नियमों की धज्जियाँउड़ाई जा रही हैं.
वीटीआर के डीएफओ ने दिए जांच के आदेश
इस पूरे मामले में सबसे हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार विभागों के अधिकारी मामले से अनजान बने हुए हैं. जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता अभिषेक कुमार ने पेड़ों की कटाई और सफाई कार्य की जानकारी होने से ही इनकार कर दिया. वहीं मनरेगा पीओ आनंद कुमार दास ने यात्रा में होने का बहाना बनाया. इस संबंध में वीटीआर वन प्रमंडल-3 के डीएफओ पंकज कुमार ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है, लेकिन यदि नहर सफाई के दौरान अवैध रूप से पेड़ों की कटाई हुई है, तो जांच कर सख्त विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी. स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि शेषनाथ बीन ने वन विभाग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है
