बगहा: बिना सूचना बोर्ड के सड़क निर्माण, घटिया ढलाई पर भड़के ग्रामीण

Bagaha News: बगहा नगर परिषद के वार्ड 23 में राधेश्याम मंदिर से हनुमानगढ़ी मार्ग तक 47 लाख की योजना में धांधली. बिना प्राक्कलन बोर्ड के घटिया सामग्री से हो रहा निर्माण, ईओ सरोज कुमार बैठा ने दिए जांच के आदेश. जानिए खबर बिस्तार से…

Bagaha News: नगर परिषद बगहा क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में चल रहे विकास कार्यों में बरती जा रही कड़वी अनियमितताओं और लापरवाही को लेकर अब स्थानीय जनता का गुस्सा फूट पड़ा है. नगर परिषद के वार्ड संख्या 23 स्थित बगहा बाजार में राधेश्याम मंदिर से हनुमानगढ़ी मुख्य पथ तक चल रहे पीसीसी सड़क एवं नाला निर्माण कार्य में सरकारी नियमों की कड़ाई से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. निर्माण स्थल पर न तो कोई प्राक्कलन (योजना) बोर्ड लगाया गया है और न ही तय मानकों का पालन किया जा रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों में नगर परिषद प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ कड़ा आक्रोश है.

सरकार के आदेश की अनदेखी

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बिहार सरकार और नगर विकास एवं आवास विभाग के स्पष्ट व सख्त निर्देश के बावजूद निर्माण स्थल पर योजना संबंधी सूचना बोर्ड गायब है. नियमानुसार किसी भी विकास योजना के शुरू होने से पहले उसकी कुल लागत, निर्माण एजेंसी, संवेदक का नाम, कार्य शुरू और समाप्त होने की अवधि की जानकारी वाला बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है, ताकि आम जनता को कार्य की पारदर्शिता का पता चल सके. लेकिन यहाँ संवेदक पिंटू गुप्ता द्वारा बिना किसी बोर्ड के कड़क गोपनीयता बरतते हुए काम को अंजाम दिया जा रहा है.

बिना लेबलिंग हो रही ढलाई

सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर बात करते हुए नागरिकों ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण में जीएसबी (GSB) बिछाने के बाद बगैर किसी रोलिंग और लेवलिंग के ही सीधे पीसीसी ढलाई की जा रही है. निर्माण के वक्त संबंधित कनीय या सहायक अभियंता की उपस्थिति भी नदारद रहती है, जिसके कारण ठेकेदार अपनी मनमर्जी चला रहा है.

सफेद बालू के इस्तेमाल का आरोप

इतना ही नहीं, नगर में यह चर्चा कड़ाई से बनी हुई है कि निर्धारित मानक के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं हो रहा है. स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि योजना में तय ‘सोन सैंड’ (पीला बालू) के स्थान पर घटिया दर्जे की स्थानीय सफेद बालू और निम्न गुणवत्ता की गिट्टी का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है. साथ ही, पीसीसी के लिए आवश्यक कंक्रीट सामग्री को निर्माण स्थल पर मिक्सर मशीन से तैयार न कर, कहीं अन्य स्थानों से रेडीमेड लाकर उपयोग किया जा रहा है, जिससे इसकी मजबूती पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है.

जल निकासी पर संकट

सड़क के साथ-साथ कराए जा रहे नाला निर्माण को लेकर भी लोगों ने भारी तकनीकी त्रुटियां उजागर की हैं. स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि नालों का आपस में समुचित जुड़ाव (इंटर-कनेक्टिविटी) नहीं किया गया है. कई स्थानों पर नाला पूरी तरह अधूरा छोड़ दिया गया है और पानी की आगे निकासी के लिए कोई स्पष्ट आउटलेट व्यवस्था नहीं दिख रही है.

बरसात में डूबेगा पूरा वार्ड

लोगों का कहना है कि शहर के कई वार्डों से जल निकासी के लिए पूर्व में बना मुख्य नाला वर्तमान में अतिक्रमण और भराव की वजह से पूरी तरह चोक है. ऐसे में नए बन रहे नालों का पानी आगे कहाँ जाएगा, इसका कोई खाका प्रशासन के पास नहीं है, जिससे आने वाले बरसात के दिनों में पूरे इलाके में भीषण जलजमाव का कड़ा संकट पैदा होना तय माना जा रहा है.

लागत को लेकर विरोधाभास

इस पूरे मामले में जब नगर परिषद के कनीय अभियंता ऋषिकेश से संपर्क किया गया, तो उन्होंने लागत को लेकर अलग ही दावा पेश किया. उन्होंने बताया कि यह सड़क एवं नाला निर्माण कार्य करीब 39 लाख रुपये की लागत से कराया जा रहा है, जो अनुमानित प्राक्कलित राशि से 14 प्रतिशत विलो (कम दर) पर स्वीकृत हुआ है. जब उनसे प्राक्कलन बोर्ड नहीं होने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि संवेदक ने उन्हें बोर्ड लगा देने की मौखिक जानकारी दी है; जबकि जमीनी हकीकत यह है कि मौके पर स्थानीय लोगों को दूर-दूर तक कोई बोर्ड दिखाई नहीं पड़ा.

जांच के बाद होगी कड़क कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सरोज कुमार बैठा ने सख्त रुख अख्तियार किया है. उन्होंने कहा कि किसी भी निर्माण कार्य के शुरू होने से पहले योजना की पूरी जानकारी वाला प्राक्कलन बोर्ड लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य है, और सारा काम इंजीनियर की सीधी निगरानी में ही होना चाहिए. ईओ ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि बिना बोर्ड लगाए या मानकों की अनदेखी कर घटिया सामग्री से कार्य कराया जा रहा है, तो इसकी एक उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाएगी.

बगहा से चंद्रप्रकाश आर्य की रिपोर्ट

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Published by: Purushottam Kumar

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