तीन साल बाद भी 47 जलापूर्ति योजनाएं बंद, गर्मी बढ़ते ही बेतिया के गांवों में गहराएगा पेयजल संकट

पश्चिम चंपारण में ग्रामीण जलापूर्ति की 47 महत्वपूर्ण योजनाएं तीन साल बाद भी पूरी तरह चालू नहीं हो सकी हैं. 2023 में 1459 योजनाएं बंद थीं. पीएचईडी का कहना है कि तकनीकी खामियों के आधार पर योजनाओं की मरम्मत करायी जा रही है.

बेतिया पीएचईडी अपडेट: पश्चिम चंपारण में ग्रामीण जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पंचायती राज विभाग से लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) को 3490 जलापूर्ति योजनाएं हस्तांतरित हुए करीब तीन साल हो चुके हैं. तकनीकी रूप से सक्षम विभाग को जिम्मेदारी मिलने के बावजूद 47 महत्वपूर्ण योजनाएं अब भी बंद पड़ी हैं. ऐसे में गर्मी बढ़ने के साथ इन योजनाओं से जुड़े गांवों में पेयजल संकट की चिंता भी बढ़ रही है.

2023 में 1459 योजनाएं थीं बंद

पीएचईडी के अनुसार वर्ष 2023 में योजनाओं के हस्तांतरण के समय 3490 में से 2021 जलापूर्ति योजनाएं चालू थीं, जबकि 1459 योजनाएं बंद मिली थीं. इनमें 47 ऐसी योजनाएं थीं, जो अपूर्ण या अत्यधिक क्षतिग्रस्त होने के कारण लंबे समय से बंद थीं.

विभाग का कहना है कि इन योजनाओं को चिह्नित कर दोबारा चालू कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.

तकनीकी खामियों के अनुसार कराया जा रहा काम

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण प्रमंडल, बेतिया के कार्यपालक अभियंता नितिन कुमार ने बताया कि बंद योजनाओं की स्थिति और तकनीकी खामियों के आधार पर उन्हें दुरुस्त कराने का काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सभी 47 योजनाओं को चालू कराने का प्रयास जारी है.

हालांकि, इन योजनाओं को पूरी तरह बहाल करने में कितना समय लगेगा, इसे लेकर अभी स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आयी है.

491 योजनाओं से हो रही जलापूर्ति

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में 491 जलापूर्ति योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति की जा रही है. इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति को लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं. कहीं मोटर खराब होने से पानी की सप्लाई बाधित होती है, तो कहीं तकनीकी खराबी के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है.

गर्मी में बड़ी चुनौती बनेगी बंद योजनाएं

तापमान बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की मांग भी बढ़ जाती है. ऐसे में लंबे समय से बंद 47 योजनाओं को चालू कराना विभाग के लिए बड़ी चुनौती है. प्रभावित गांवों में लोगों को समय पर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए मरम्मत कार्य में तेजी के साथ नियमित तकनीकी जांच की व्यवस्था भी जरूरी है.

ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की निगरानी और खराबी की स्थिति में त्वरित मरम्मत की व्यवस्था मजबूत होने पर ही लोगों को स्थायी राहत मिल सकेगी.

यह भी पढे़ं:

बिहार में सड़क हादसा: आर्केस्ट्रा देख रहे लोगों को अनियंत्रित बस ने कुचला, 5 की मौत


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By मधुकर मिश्रा

मधुकर मिश्र ने 1986 में आकाश मार्ग हिंदी दैनिक देवरिया उत्तर प्रदेश से पत्रकारिता की शुरुआत की थी. इसके बाद में दिल्ली और पटना से एक साथ प्रकाशित संध्या प्रहरी, आज, नवभारत टाइम्स में कार्य किए. इस क्रम में पश्चिम चंपारण जिला मुख्यालय बेतिया में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ रह चुके हैं. वर्तमान में बेतिया प्रभात खबर हिंदी दैनिक सह मल्टीमीडिया कार्यालय से जुड़कर कार्य कर रहे हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >