Bihar Flood Alert: गंडक बराज से करीब 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना के बाद बगहा-2 प्रखंड के नदी किनारे बसे गांवों में दहशत का माहौल है. भेड़िहारी और चकदहवा समेत आसपास के क्षेत्रों में ग्रामीण रातभर जागकर नदी के जलस्तर और आसपास की स्थिति पर नजर रखते रहे. प्रशासन ने भी देर रात तक माइकिंग कर लोगों से सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की.
गंडक में 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से बढ़ी चिंता
बताया जा रहा है कि नेपाल से आने वाले पानी के बीच वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से नदी में करीब 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. पानी छोड़े जाने की जानकारी मिलते ही निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गयी.
ग्रामीणों को आशंका है कि यदि नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है तो निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकता है. इसी को देखते हुए लोग पहले से ही स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.
देर रात तक प्रशासन ने करायी माइकिंग
बुधवार की रात करीब 11 बजे तक प्रशासन की ओर से प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में माइकिंग करायी जाती रही. ग्रामीणों से सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की गयी.
प्रशासन ने लोगों को किसी भी संभावित आपात स्थिति के लिए तैयार रहने और नदी के आसपास अनावश्यक रूप से नहीं जाने की सलाह दी है. लगातार निगरानी के कारण लोगों में कुछ हद तक भय कम हुआ है.
चकदहवा-भेड़िहारी में रातभर जागते रहे ग्रामीण
चकदहवा और भेड़िहारी क्षेत्र में ग्रामीण रातभर जागकर गंडक नदी के जलस्तर पर नजर रखते रहे. कई परिवार अपने घरों के आसपास की स्थिति की निगरानी करते रहे, ताकि पानी बढ़ने की स्थिति में समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचा जा सके.
ग्रामीणों का कहना है कि नदी के जलस्तर में किसी भी तरह की अचानक वृद्धि को लेकर वे सतर्क हैं.
एसडीओ ने लोगों से सजग रहने की अपील की
बगहा अनुमंडल पदाधिकारी चांदनी कुमारी ने आमजन से सजग रहने की अपील की है. उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में लोग तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचें.
प्रशासन की ओर से लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और किसी भी तरह की सूचना के लिए स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने को कहा गया है.
प्रशासन की निगरानी से ग्रामीणों को राहत
गंडक में पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है. माइकिंग के जरिए लोगों को आवश्यक सावधानी बरतने की जानकारी दी जा रही है.
फिलहाल चकदहवा और भेड़िहारी सहित नदी किनारे बसे गांवों में ग्रामीण सतर्क हैं और जलस्तर में बदलाव की निगरानी कर रहे हैं.
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