सिमरिया गंगा घाट में डूबे दूसरे युवक का शव 70 घंटे बाद बरामद

सिमरिया गंगा घाट में डूबे मटिहानी थाना क्षेत्र के चकबल्���ी दियारा निवासी नरेन्द्र राय के 22 वर्षीय पुत्र शुभम कुमार का शव तीसरे दिन यानी लगभग 70 घंटे बाद रविवार की सुबह मिला है.

बीहट. सिमरिया गंगा घाट में डूबे मटिहानी थाना क्षेत्र के चकबल्ली दियारा निवासी नरेन्द्र राय के 22 वर्षीय पुत्र शुभम कुमार का शव तीसरे दिन यानी लगभग 70 घंटे बाद रविवार की सुबह मिला है. जानकारी के अनुसार स्थानीय गोताखोर अनिल, जाटो, भरत, तेतर, सीताराम, सुनील, अमर, शत्रुघ्न, अर्जुन और मनीष ने नाव से खोजबीन शुरू किया. घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर वाटर पंप के पास उसका शव मिला. चकिया पुलिस ने सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के उपरांत शव को उसके परिजनों को सौंप दिया.शव गांव पहुंचते ही उसके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. अपने बेटे की शव से लिपटकर शुभम की मां दहाड़ मारकर रो रही थी और उसके पिता, बहनें, भाइयों, ग्रामीणों एवं रिश्तेदारों में चीख पुकार मच गयी. मृतक के परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे लोगों की आंखें भी नम हो गयी.

मटिहानी थाना क्षेत्र के चकबल्ली दियारा का रहनेवाला था शुभम

मृतक का अंतिम दाह संस्कार सिमरिया गंगा नदी के तट पर किया गया.वहीं दूसरी ओर सामाजिक व राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने शोकाकुल परिजनों से मिलकर सांत्वना दिया और इस दुख की घड़ी में हरसंभव सहयोग करने का आश्वासन दिया. विदित हो कि शुक्रवार को दो युवक बीहट का आदित्य कुमार और चकबल्ली दियारा के शुभम की सिमरिया में गंगा स्नान करने के दौरान डूबने से मौत हो गयी थी. काफी अथक प्रयास के बाद आदित्य का शव बरामद किया गया लेकिन दो दिनों बाद भी आदित्य का शव नहीं खोजा जा सका.रविवार की सुबह उसका शव बरामद किया गया.शुभम अपने तीन दोस्तों के साथ गंगा किनारे स्नान करने पहुंचा था.इस दौरान पैर फिसलने से वो गंगा में डूब गया.

जिला प्रशासन से 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग

इस घटना को लेकर समाजसेवी आलोक कुमार,सौरव भारद्वाज सहित अन्य लोगों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंप कर दोनों पीड़ित परिवार को 50-50 लाख मुआवजा देने की मांग करते हुए कहा कि सिमरिया घाट में व्यवस्था के नाम पर जो भी दोषी है,उपस्थित सभी पदाधिकारियों के खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई होनी चाहिये.इन लोगों ने कहा सिमरिया घाट पर पूर्व में भी एसडीआरएफ की लापरवाही सामने आयी थी लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.उन्होंने कहा एसडीआरएफ वहां कोई समाजसेवा नहीं कर रहा है,लोगों के जीवन को बचाना उनकी ड्यूटी है,जिसमें वे सर्वथा फेल ही साबित हुए हैं.

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By Manish kumar

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