Begusarai Rinku Death Case : बेगूसराय के चर्चित रिंकू कुमारी मौत मामले में पांच साल बाद जांच फिर से शुरू हो गई है. हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद आईजी विकास वैभव के नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने घटनास्थल का निरीक्षण कर नए सिरे से जांच शुरू कर दी है.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद SIT ने संभाली जांच
दरअसल, वर्ष 2021 में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, वीरपुर की वार्डन रिंकू कुमारी की मौत को पुलिस ने आत्महत्या मानते हुए अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी. लेकिन हाईकोर्ट ने जांच में कई गंभीर खामियां बताते हुए मामले की दोबारा जांच के निर्देश दिए. इसके बाद आईजी विकास वैभव के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने सोमवार से नए सिरे से जांच शुरू कर दी.
चार घंटे चली समीक्षा बैठक, फिर पहुंची जांच टीम
जांच शुरू करने से पहले डीआईजी कार्यालय स्थित कैंप ऑफिस में करीब चार घंटे तक एसआईटी की बैठक हुई. इस दौरान पुराने केस की फाइल, वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों, दस्तावेजों तथा जांच की प्रगति की समीक्षा की गई. इसके बाद मृतका की बेटी तेजस्विनी कुमारी से आवश्यक जानकारी और दस्तावेज लेने के बाद टीम वीरपुर के मुजफ्फरा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया.
आईजी बोले, हर पहलू की होगी निष्पक्ष जांच
आईजी विकास वैभव ने कहा कि हाईकोर्ट ने पूर्व जांच में कई गंभीर सवाल उठाए हैं. इसलिए अब हर पहलू की नए सिरे से जांच की जाएगी. दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है और जिन लोगों के पास मामले से जुड़ी कोई भी जानकारी है, उनसे आगे आकर सहयोग करने की अपील की गई है. उन्होंने बताया कि शुरुआती अध्ययन में भी कई ऐसे बिंदु मिले हैं, जिनकी गहन जांच आवश्यक है.
2021 में हुई थी वार्डन की मौत
जानकारी के अनुसार 4 अप्रैल 2021 को रिंकू कुमारी अपने घर से स्कूल के लिए निकली थीं. दोपहर में उनकी मौत की सूचना परिजनों को मिली. परिवार का आरोप है कि पहले शव पंखे से लटका होने की तस्वीरें दिखाई गईं, लेकिन जब वे स्कूल पहुंचे तो शव फर्श पर पड़ा मिला और शरीर पर मिट्टी व धूल लगी थी. तभी से परिजन इसे हत्या बताते रहे, जबकि पुलिस ने आत्महत्या का मामला मानकर जांच बंद कर दी थी.
बेटी ने एफआईआर और जांच पर लगाए गंभीर आरोप
मृतका की बेटी तेजस्विनी कुमारी का आरोप है कि नामजद आरोपियों के खिलाफ उनकी शिकायत के अनुरूप प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई. उनका यह भी दावा है कि जमीन दिलाने के नाम पर उनकी मां से 15 लाख रुपये लिए गए थे और घटना वाले दिन इसी रकम को लेकर पंचायत होनी थी. परिजनों का आरोप है कि इसी विवाद में हत्या कर मामले को आत्महत्या का रूप दिया गया.
हाईकोर्ट ने जांच की कई कमियां गिनाईं
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि घटना वाले दिन स्कूल के सीसीटीवी कैमरे सुबह 7:57 बजे बंद हो गए थे और शव मिलने के समय दोपहर 1:45 बजे फिर चालू हुए. इसके अलावा संदिग्धों के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और टावर लोकेशन की प्रभावी जांच नहीं की गई. चपरासी के बयान में विरोधाभास होने के बावजूद उससे गहन पूछताछ नहीं की गई और संभावित साक्ष्यों की अनदेखी कर मामले को जल्दबाजी में आत्महत्या मानकर बंद कर दिया गया.
अनुभवी अधिकारियों की टीम कर रही जांच
आईजी विकास वैभव के नेतृत्व वाली एसआईटी में बेगूसराय रेंज के डीआईजी शैलेश कुमार सिन्हा, विशेष निगरानी इकाई पटना के डीएसपी अशोक झा, बगहा के एसडीपीओ निहार भूषण, मुजफ्फरपुर पूर्वी के एसडीपीओ अलय वत्स, पुलिस निरीक्षक कुमार अभिनव समेत कई अधिकारी शामिल हैं.
Also Read : बेगूसराय के इस गांव में 4 दिन से नहीं है लाइट, 250 उपभोक्ताओं की बिजली ठप
