Begusarai Flood Boat Demand : बेगूसराय जिले के बखरी प्रखंड स्थित परिहारा पंचायत में बाढ़ और जलभराव ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. खेतों तक जाने का रास्ता पानी में डूबने के कारण पर्चाधारी दलित और महादलित परिवारों ने जिला परिषद सदस्य के माध्यम से प्रशासन से नाव की मांग की है. नाव नहीं होने से ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर खेती करने को मजबूर हैं.
जलभराव से डूबा खेतों तक जाने वाला मुख्य रास्ता
सरकार द्वारा दलित एवं महादलित परिवारों को आजीविका चलाने के लिए खेती योग्य भूमि उपलब्ध कराई गई है. लेकिन हर वर्ष जुलाई के बाद सावन और भादो के महीने में भारी जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इससे खेतों तक पहुंचने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह से पानी में डूब जाता है और किसानों के सामने भारी संकट खड़ा हो जाता है.
जान जोखिम में डालकर खेती करने की मजबूरी
गांव में नाव की कोई भी सरकारी व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अपनी जान हथेली पर रखकर पानी पार करना पड़ता है. स्थानीय लोगों ने बताया कि आवागमन के इसी खतरनाक रास्ते पर पूर्व में डूबने से दो लोगों की दुखद मौत भी हो चुकी है. इसके बावजूद अब तक प्रशासन ने सुरक्षा के लिए कोई भी स्थायी व्यवस्था नहीं की है.
जिला परिषद सदस्य ने एसडीओ को सौंपा आवेदन
समस्या की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने जिला परिषद सदस्य अमित कुमार देव से मुलाकात कर अपनी परेशानी साझा की. इसके बाद ग्रामीणों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान वाला एक विस्तृत आवेदन तैयार किया गया. यह आवेदन अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) सन्नी कुमार सौरव को सौंपकर अविलंब समाधान की गुहार लगाई गई है.
आजीविका और सुरक्षा के लिए दो नावों की मांग
जिला परिषद सदस्य अमित कुमार देव ने कहा कि यह मामला केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि गरीब परिवारों की सुरक्षा से भी जुड़ा है. उन्होंने प्रशासन से बाढ़ के मौसम को देखते हुए संबंधित स्थान पर अविलंब दो नावों की व्यवस्था करने की मांग की है. इससे ग्रामीण सुरक्षित तरीके से अपने खेतों तक पहुंच सकेंगे और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सकेगा.
प्रशासन से शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद
इस महत्वपूर्ण मांग के समर्थन में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने आवेदन पर अपनी सहमति दर्ज कराई है. फिलहाल सभी पर्चाधारी किसानों को अनुमंडल प्रशासन की ओर से शीघ्र और सकारात्मक कार्रवाई की पूरी उम्मीद है. अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इन गरीब दलित परिवारों के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करता है.
