सुपोषित पंचायत तेतरी में सघन दस्त रोकथाम अभियान शुरू

प्रखंड क्षेत्र के सुपोषित ग्राम पंचायत तेतरी में सघन दस्त रोकथाम अभियान का शुभारंभ किया गया.

डंडारी. प्रखंड क्षेत्र के सुपोषित ग्राम पंचायत तेतरी में सघन दस्त रोकथाम अभियान का शुभारंभ किया गया. इस अभियान का मुख्य लक्ष्य दस्त से होने वाले शिशु मृत्यु दर को पूर्ण रूप से शून्य पर लाना है. यह अभियान 14 सितंबर 2025 तक संपूर्ण प्रखंड क्षेत्र में चलेगा. डायरिया के कारण होने वाले कुल 13 प्रतिशत शिशु मृत्यु दर्ज की गई है.अभियान का शुभारंभ सुपोषित ग्राम पंचायत तेतरी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 22 पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मनमोहन सिंह, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक शाह जियाउल रहमान, पंचायत के मुखिया आदित्य राज वर्मा, पिरामल प्रतिनिधि दीपक मिश्रा एवं आईसीडीएस के प्रखंड समन्वयक पिंकल कुमार आदि ने सामूहिक रूप से पिता काटकर उद्घाटन किया. इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ मनमोहन सिंह ने बताया कि निर्जलीकरण और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी डायरिया से होने वाली मौत का मुख्य कारण है. इसके साथ ही उन्होंने कहा ओआरएस और जिंक का सही उपयोग डायरिया के दौरान अति प्रभावी रूप से कार्य करता है. इसके साथ ही उन्होंने कहा इस अभियान को सफल बनाने को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. जिसमें आईसीडीएस, शिक्षा विभाग, जीविका, पीएचडी, पीरामल फाउंडेशन और यूनिसेफ जैसी संस्थाओं का समन्वय शामिल है. इसके अतिरिक्त स्थानीय स्वयंसेवी संस्थान, युवा स्वयं सेवकों, धर्म गुरुओं आदि से जागरूकता फैलाने को लेकर अपील की. बदलते मौसम के कारण सर्दी खांसी और जुकाम जैसी मौसमी बीमारियों के साथ-साथ डायरिया की संभावना बढ़ गई है. इसके साथ ही सभी आयु वर्ग के लोगों को विशेष सावधानी बरतने और स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की सलाह दी है. स्वच्छता ही सुरक्षा बच्चों के लिए अनिवार्य है यह शिक्षा : – चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि बच्चों को स्वच्छता की शिक्षा देना अत्यंत महत्वपूर्ण है. क्योंकि बच्चे स्वच्छ रहें तो ही स्वास्थ्य रह सकते हैं. उन्होंने अभिभावक और शिक्षक से आग्रह किया कि वे बच्चों को भोजन से पहले और बच्चों को जमीन में भोजन से पहले और शौचालय के बाद हाथ दोनों अनिवार्य रूप से करनी चाहिए. डायरिया के प्रति लक्षणों और सतर्कता के साथ सही समय पर उचित प्रबंधन से बच्चों को इस गंभीर बीमारी से आसानी से बचाया जा सकता है. नवजात बच्चों को दस्त के दौरान और उसके बाद आयु के अनुसार स्तनपान पुपरी आहार और भोजन जारी रखने की सलाह दी गई. इस दौरान मौके पर एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका के अलावे दर्जनों की संख्या में अन्य लाभार्थी भी मौजूद रहे.

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Published by: Manish kumar

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