(बेगूसराय से विकाश मिश्रा)
Begusarai News : बेगूसराय में मॉडर्न थिएटर फाउंडेशन द्वारा आयोजित पांच दिवसीय नाट्य कार्यशाला का सफल समापन हुआ. कार्यशाला के दौरान बच्चों को अभिनय, संवाद अदायगी, बॉडी लैंग्वेज और मंच संचालन की बारीकियां सिखाई गईं. समापन अवसर पर बच्चों ने नाटक और लोकनृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया.
‘मोबाइल की दुनिया’ नाटक से दिया जागरूकता का संदेश
उत्क्रमित मध्य विद्यालय महमदपुर में आयोजित कार्यशाला के समापन समारोह में बच्चों ने मोबाइल की दुनिया नाटक का मंचन किया. नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मोबाइल का उपयोग जरूरत और सीमित समय के अनुसार ही किया जाना चाहिए. प्रस्तुति में सप्तम एवं अष्टम वर्ग की छात्राओं दिव्या कुमारी, दुर्गा कुमारी, सोनाली कुमारी, सोनाक्षी कुमारी, करूणा कुमारी और शिवानी कुमारी ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया.
झिझिया और जट-जटिन नृत्य ने बांधा समां
कार्यक्रम में शिवानी, अनीका राज, करूणा और अंजली ने पारंपरिक झिझिया एवं जट-जटिन नृत्य नाटिका प्रस्तुत की. लोक संस्कृति पर आधारित इस प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा और बच्चों का उत्साहवर्धन किया.
नाट्य कला बच्चों के सर्वागीण विकास का सशक्त माध्यम
कार्यशाला के निर्देशक एवं नाट्य प्रशिक्षक परवेज़ यूसुफ़ ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत बच्चों को नाट्य कला सिखाना उनके व्यक्तित्व विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि नाट्य कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि एक बौद्धिक और मानसिक खेल भी है, जिसमें सोच, समझ, कल्पना और संवेदनाओं का उपयोग किया जाता है.
विद्यालय परिवार ने जताया आभार
शिक्षक प्रवीण कुमार ने प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यशाला से बच्चों को काफी लाभ मिला है और उनमें नया उत्साह देखने को मिल रहा है. वहीं विद्यालय के प्रधानाचार्य संजय सिंह ने कहा कि बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास और रचनात्मक सोच विकसित करने के लिए कला शिक्षा अत्यंत आवश्यक है.
25 से अधिक बच्चों ने लिया हिस्सा
कार्यशाला में चंदा, काजल, संध्या, जूली, सोनाक्षी सहित 25 से अधिक बच्चों ने सक्रिय भागीदारी निभाई. कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षक सुमन कुमार, कुमारी विनिता, लक्ष्मी, सबिता कुमारी, ममता कुमारी, अभिलाषा कुमारी, प्रवीण पंकज, गोपाल कुमार और रत्नेश कुमार सहित कई शिक्षकों एवं रंगकर्मियों ने सहयोग किया.
कला के माध्यम से सीखने का अनूठा प्रयास बना मिसाल
पांच दिनों तक चली इस कार्यशाला ने बच्चों को अभिनय के साथ-साथ आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति और सामाजिक संदेश देने की कला भी सिखाई. समापन समारोह में बच्चों की प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी बड़े मंचों पर अपनी पहचान बना सकती हैं.
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