Begusarai News: मंझौल स्थित प्रसिद्ध जयमंगला मंदिर में पिछले 9 दिनों से चल रहे नवाह यज्ञ का मंगलवार को विधि-विधान एवं धार्मिक अनुष्ठान के साथ समापन हो गया. नवाह के अंतिम दिन मंदिर परिसर में सुबह से ही माता के दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. कतारबद्ध होकर भक्तों ने माता जयमंगला के दर्शन किए और परिवार की सुख-समृद्धि की मन्नतें मांगीं.
52 शक्तिपीठों में से एक है प्रसिद्ध जयमंगला धाम
एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की गोखुर झील 'कावर झील' के तट पर स्थित जयमंगला धाम को 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है. इसी अगाध आस्था के कारण मंगलवार को मंझौल और बेगूसराय के अलावा आसपास के कई जिलों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे.
ऐतिहासिक महत्व और नए रूप में सजा मंदिर
जयमंगलागढ़ क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व में यहां खुदाई के दौरान बौद्धकालीन कई प्राचीन मूर्तियां मिल चुकी हैं. हाल ही में मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार कराया गया है, जिससे इसका स्वरूप और भी आकर्षक हो गया है. अनुष्ठान के समापन अवसर पर पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया था.
