बेगूसराय जिले में एनीमिया के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को और प्रभावी बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है. इसी क्रम में शनिवार को सदर अस्पताल स्थित जिला स्वास्थ्य समिति सभागार में स्वास्थ्य विभाग की ओर से पिरामल फाउंडेशन के तकनीकी सहयोग से एनीमिया मॉड्यूल आधारित जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया.
इसमें जिले के विभिन्न प्रखंडों से चयनित एएनएम एवं जीएनएम ने हिस्सा लिया. प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया गया.
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य
प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को एनीमिया की समय पर जांच, पहचान, उपचार, परामर्श और आवश्यकता पड़ने पर रेफरल की प्रक्रिया में दक्ष बनाना था.
अब ये मास्टर ट्रेनर अपने-अपने प्रखंड एवं स्वास्थ्य संस्थानों में अन्य एएनएम, जीएनएम और संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे. इससे एनीमिया की स्क्रीनिंग, जोखिम की पहचान, उपचार और फॉलोअप की व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी.
गर्भवती महिलाओं और किशोरियों पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान गर्भवती महिलाओं, किशोरियों समेत अन्य लक्षित लाभार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया.
स्वास्थ्यकर्मियों को एनीमिया के स्वास्थ्य प्रभाव, गर्भावस्था में इससे होने वाले जोखिम, हीमोग्लोबिन जांच की सही प्रक्रिया और डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर के उपयोग की जानकारी दी गई.
टी-3 रणनीति और व्यावहारिक अभ्यास
इसके अलावा आयरन एवं फोलिक एसिड की भूमिका, उपचार प्रोटोकॉल, टी-3 रणनीति (टेस्ट, ट्रीट एवं टॉक/रेफरल) तथा समुदाय स्तर पर व्यवहार परिवर्तन संचार जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया गया. प्रतिभागियों को केस स्टडी, समूह चर्चा, व्यावहारिक अभ्यास और प्रश्नोत्तरी के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया.
सिविल सर्जन का बयान
सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि एनीमिया गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है और इसका सीधा प्रभाव मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर पड़ता है. गर्भवती महिलाओं में समय पर एनीमिया की पहचान और समुचित उपचार से कई गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है.
उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनरों का तैयार होना अभियान को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. कार्यक्रम में संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. सुभाष रंजन झा, पिरामल से दीपक मिश्रा समेत अन्य मौजूद थे.
