Begusarai News: राम कुमारी अयोध्या विधि महाविद्यालय प्रशासन ने विश्वविद्यालय द्वारा गठित विवादित तदर्थ समिति के तथाकथित सचिव डॉ. कमलेश कुमार द्वारा अतिथि प्राध्यापिका डॉ. परिणीता कुमारी को नियमित प्राचार्य बनाए जाने के दावे को पूरी तरह असत्य और अवैध करार दिया है. कॉलेज प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यह मामला वर्तमान में उच्च न्यायालय में लंबित है, जहां याचिका स्वीकार कर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया जा चुका है. ऐसे में कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के बावजूद ऐसी घोषणाएं पूरी तरह से गैर-कानूनी और नियम विरुद्ध हैं.
आवश्यक अर्हता न होने के कारण नहीं किया गया था सेवा विस्तार
महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार संबंधित अतिथि प्राध्यापिका नियमित प्राचार्य पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अर्हता पूरी नहीं करती हैं. साथ ही उनका कार्य व्यवहार भी संस्थान के हित में नहीं था, जिसके चलते महाविद्यालय द्वारा पूर्व में उनके सेवा विस्तार को मंजूरी नहीं दी गई थी.
तदर्थ समिति के पास नहीं है नियुक्ति का अधिकार
नियमों का हवाला देते हुए बताया गया कि तदर्थ समिति का गठन केवल 6 महीनों के लिए संस्था की देखरेख के उद्देश्य से किया जाता है. इस समिति के पास किसी भी पद पर नियुक्ति करने या किसी को पद से हटाने का संवैधानिक अधिकार नहीं है. ऐसे में समिति द्वारा नियमित प्राचार्य के चयन का दावा पूरी तरह से असंवैधानिक और उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है.
महाविद्यालय में सुचारू रूप से चल रहा पठन-पाठन, अफवाहों से बचें
वर्तमान में प्रभारी प्राचार्य प्रो. मुकेश कुमार के नेतृत्व में महाविद्यालय के सभी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्य सुचारू और पारदर्शी ढंग से संचालित हो रहे हैं. महाविद्यालय प्रशासन ने सभी छात्र-छात्राओं और अभिभावकों से अपील की है कि वे इस प्रकार की भ्रामक खबरों और अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें.
