छात्रा की मौत के बाद शाम्हो में उतर आया आक्रोश

विपिन कुमार मिश्र, बेगूसराय : शाम्हो के लोगों को यह पता नहीं था कि सोमवार का दिन इस इलाके के लिए मनहूस साबित होगा और एक साथ कई परिवारों में कोहराम मच जायेगा. शाम्हो हाइस्कूल के प्रांगण में छत का सीढ़ी टूट गिरने और इसमें एक छात्रा की मौत व तीन छात्रा की हालत चिंताजनक […]

विपिन कुमार मिश्र, बेगूसराय : शाम्हो के लोगों को यह पता नहीं था कि सोमवार का दिन इस इलाके के लिए मनहूस साबित होगा और एक साथ कई परिवारों में कोहराम मच जायेगा. शाम्हो हाइस्कूल के प्रांगण में छत का सीढ़ी टूट गिरने और इसमें एक छात्रा की मौत व तीन छात्रा की हालत चिंताजनक होने के बाद इलाके में पूरे दिन कोहराम मचा रहा. जैसे ही घटना की जानकारी लोगों को हुई कि शाम्हो की सड़कों पर गम व आक्रोश दिखाई पड़ने लगा.

चार घंटे तक शाम्हो-सूर्यगढ़ा पथ में आवागवन रहा ठप : स्कूली छात्रा की मौत व तीन छात्रा के गंभीर रू प से घायल होने के बाद आक्रोशित लोगों ने छात्रा के शव के साथ शाम्हो-सूर्यगढ़ा पथ को जाम कर दिया. आक्रोशित लोग कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे. लोगों का कहना था कि जब तक इस घटना के लिए जिम्मेदार स्कूल कर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं किया जायेगा तब तक सड़क जाम जारी रहेगा.
स्थानीय लोग इस घटना के लिए संपूर्ण रूप से दोषी विद्यालय प्रबंधन को मान रहे थे. काफी मशक्कत के बाद बेगूसराय सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजीव कुमार चौधरी के द्वारा फोन पर आक्रोशित लोगों को समझाने और दोषी पर कार्रवाई एवं नियमानुसार पीडि़त परिवार को सहायता उपलब्ध कराने के आश्वासन के बाद जाम समाप्त किया गया. इसके बाद शाम्हो-सूर्यगढ़ा पथ में आवागवन चालू हुआ.
लंबे समय से जर्जर अवस्था में था सीढ़ी : शाम्हो हाइस्कूल के छत की सीढ़ी लंबे समय से जर्जर अवस्था में था. इसके बाद भी उसी सीढ़ी के सहारे छत पर आना-जाना होता था. अब सवाल यह उठता है कि अगर सीढ़ी जर्जर अवस्था में था तो इसकी सूचना स्कूल के प्रधान के द्वारा विभागीय अधिकारी को दी गयी या फिर क्यों नहीं इस जर्जर सीढ़ी को खतरा मानते हुए इस पर चढ़ने व उतरने के लिए रोक लगायी गयी. कहीं न कहीं इस घटना के लिए विद्यालय प्रबंधन प्रथम दृष्टया दोषी नजर आ रहे हैं.
असुरक्षित है शाम्हो हाइस्कूल : शाम्हो प्रखंड में एक मात्र हाइस्कूल है वह भी असुरक्षित है. इस स्कूल में न तो चाहरदीवारी है और न ही छात्र-छात्राओं के लिए किसी प्रकार की सुविधा है. विद्यालय में जिस प्रकार की घटना घटी अगर स्कूल के अंदर कॉमन रूम होता तो छात्राएं छत पर जाने के बजाया कॉमन रूम में अपना समय व्यतीत कर सकती थी.
लंबे समय से विद्यालय को सुरक्षित करने की मांग की जाती रही है लेकिन आज तक इस दिशा में सकारात्मक पहल नहीं हो पायी है. नतीजा है कि यहां पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्रा हमेशा अपने को असुरक्षित महसूस करते हैं.
विद्यालय में हादसे के बाद फरार हो गये विद्यालय कर्मी
बताया जाता है कि जैसे ही विद्यालय में घटना घटी कि विद्यालय के कर्मी आनन-फानन में लोगों की नजरों बच कर भाग निकले. विद्यालय के प्रधान घायल छात्रा को लेकर अस्पताल तक गये लेकिन उसके बाद दिखाई नहीं पड़े. घटना के बाद विद्यालय में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं में भी हलचल मच गयी. अभिभावकों को भी जैसे ही घटना की जानकारी मिली कि विद्यालय की तरफ अपने-अपने बच्चों की सुधि लेने के लिए पहुंच गये.
चीख और पुकार से गमगीन हुआ इलाका
स्कूली छात्रा की मौत के बाद परिजनों को जैसे ही घटना की जानकारी मिली कि परिजनों के क्रंदन से पूरा वातावरण गमगीन हो गया. बताया जाता है कि इस हादसे में मृत छात्रा फूल कुमारी के माता-पिता दिल्ली में रहते हैं. एक भाई पटना में रहकर पढ़ाई करता है. एक बहन और अपने दादा के साथ वह घर पर रहकर पढ़ाई कर रही थी. अपनी पुत्री की मौत की खबर जैसे ही दिल्ली में रह रहे माता-पिता के पास पहुंची कि वो घर के लिए रवाना हो गये हैं.
माता-पिता के आने के बाद स्कूली छात्रा का किया जायेगा दाह संस्कार
हादसे में स्कूली छात्रा के मौत के बाद उसके माता-पिता के आने का इंतजार किया जा रहा है.माता-पिता के आने के बाद ही उसका अंतिम संस्कार किया जायेगा. घटना के बाद पूर्व जिला पार्षद सुरेंद्र सेठ,जिला पार्षद प्रतिनिधि मनोज सिंह, मुखिया प्रतिनिधि नुनुबाबू सिंह, कांग्रेस नेता अमोल सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप कुमार,अकबरपुर बरारी पंचायत के मुखिया मणिकांत सिंह समेत बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंचकर पीडि़त परिवार को सांत्वना दिया.
शाम्हो पीएचसी अगर दुरूस्त होता तो बच सकती थी छात्रा की जान
लाख प्रयास के बाद भी शाम्हो प्रखंड भगवान भरोसे है. कहने को यहां पीएचसी एवं प्रखंड कार्यालय कार्यरत है लेकिन सुविधा मिलने के नाम पर शून्य है. बताया जाता है कि पीएचसी में न तो समय पर चिकित्सक रहते हैं और न ही कर्मी नतीजा है कि लोगों को मरीजों को लेकर सूर्यगढ़ा या लखीसराय के लिए कूच करना पड़ता है. अगर शाम्हो पीएचसी में व्यवस्था उपलब्ध रहती तो स्कूली छात्रा की जान बच सकती थी. लेकिन सूर्यगढ़ा ले जाने के क्रम में स्कूली छात्रा रास्ते में ही दम तोड़ दी.
कहते हैं विद्यालय प्रधान
छत की सीढ़ी जर्जर होने के बारे में छात्र-छात्राओं को बताया जाता था और उस पर नहीं चढ़ने की भी हिदायत दी जाती थी इसके बाद भी छात्र-छात्रा उसी सीढ़ी होकर छत पर चले जाते थे.
राजेश कुंवर, प्रधानाध्यापक, कल्याण सिंह उच्च विद्यालय शाम्हो, बेगूसराय

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