Bihar Wildlife Compensation Scheme : बौसी सहित बिहार के गैर-वन क्षेत्रों में यदि किसी व्यक्ति, पशुधन, मकान या फसल को वन्यजीवों से नुकसान होता है तो अब पीड़ितों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता मिलेगी. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने इसके लिए मुआवजे की नई दरें लागू कर दी हैं. इस व्यवस्था का उद्देश्य वन्यजीवों से प्रभावित परिवारों को समय पर राहत पहुंचाना और आर्थिक बोझ कम करना है.
मानव क्षति पर 10 लाख रुपये तक सहायता
बौसी वन क्षेत्र की रेंजर निधि कुमारी ने बताया कि यदि वन्यजीव के हमले में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाता है तो पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की सहायता मिलेगी. गंभीर रूप से घायल होने पर 1.44 लाख रुपये तथा सामान्य रूप से घायल होने पर 24 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी.
पशुधन और मकान के नुकसान पर भी मिलेगा मुआवजा
वन विभाग के अनुसार बाघ, तेंदुआ, हाथी, भालू, भेड़िया, लकड़बग्घा, सियार, गैंडा, जंगली सूअर, नीलगाय, गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल और मगरमच्छ जैसे वन्यजीवों से पालतू पशुओं को नुकसान होने पर भी सहायता दी जाएगी. भैंस, गाय या बैल की मृत्यु पर 24 हजार रुपये, बकरी की मृत्यु पर 7,200 रुपये तथा भेड़ या बकरे की मृत्यु पर 4,800 रुपये का मुआवजा मिलेगा.
हाथी, गैंडा अथवा भालू से मकान क्षतिग्रस्त होने पर भी राहत का प्रावधान किया गया है. पूर्ण रूप से नष्ट पक्के मकान पर 96 हजार रुपये, पूर्ण रूप से नष्ट कच्चे मकान पर 48 हजार रुपये, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पक्के मकान पर 48 हजार रुपये, गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कच्चे मकान पर 24 हजार रुपये तथा सामान्य क्षति पर 12 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी.
फसल नुकसान पर भी मिलेगी आर्थिक मदद
हाथी, घड़पड़ास और जंगली सूअर से फसल को नुकसान होने की स्थिति में किसानों को अधिकतम 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक आर्थिक सहायता मिलेगी. इससे वन्यजीव प्रभावित किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
घटना की तुरंत दें सूचना
रेंजर निधि कुमारी ने बताया कि वन्यजीवों से होने वाली क्षति पर मिलने वाली सरकारी सहायता की जानकारी अभी भी कई लोगों को नहीं है. उन्होंने अपील की कि ऐसी किसी भी घटना के तुरंत बाद वन विभाग को सूचना दें, ताकि मौके का निरीक्षण कर नियमानुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके. किसी भी जानकारी या शिकायत के लिए वन विभाग के टोल फ्री नंबर 1800-345-7252 पर संपर्क किया जा सकता है.
